महेंद्र गोयनका के केस में नया मोड़, जस्टिस जे. बी. पारदीवाला ने खुद को मामले से किया अलग; जानें पूरा मामला
Mahendra Goenka Case: सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे. बी. पारदीवाला ने महेंद्र गोयनका केस से खुद को अलग किया। करोड़ों की धोखाधड़ी के आरोपी गोयनका 2 साल से फरार हैं।
- Reported By: सुधीर दंडोतिया | Edited By: सजल रघुवंशी
महेंद्र गोयनका केस (सोर्स- सोशल मीडिया)
Justice JB Pardiwala Recusal Mahendra Goenka Case: हाल ही में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में जे. बी. पारदीवाला ने महेंद्र गोयनका से जुड़े एक मामले की सुनवाई से खुद को अलग (रिक्यूज़) कर लिया। सुनवाई के दौरान उन्होंने मामले पर असंतोष जताते हुए टिप्पणी की, “कौन हैं महेंद्र गोयनका” और इसके बाद इस प्रकरण की सुनवाई करने से इंकार कर दिया। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट की किसी अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किए जाने की संभावना है।
महेंद्र गोयनका, जो रायपुर निवासी बताए जाते हैं, पर जालसाजी और धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। आरोपों के अनुसार, यह मामला सैकड़ों करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि कंपनी के बिके हुए माल को कथित रूप से धोखे से दोबारा बेचा गया, जिससे बड़े स्तर पर आर्थिक गड़बड़ी हुई।
राजनीतिक और कारोबारी कनेक्शन
जानकारी के मुताबिक, गोयनका पहले संजय पाठक के परिवार से जुड़ी एक कंपनी में कार्यरत थे और यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में प्रबंधकीय पद संभाल चुके हैं। आरोप यह भी है कि उन्होंने फर्जी हस्ताक्षरों के जरिए कई कंपनियों पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश की। इस मामले में कोलकाता में भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 120बी सहित अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
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कई राज्यों में दर्ज केस और फरारी
कटनी (मध्य प्रदेश) में भी गोयनका और उनके सहयोगियों के खिलाफ 420, 120बी, 467, 468 और 471 जैसी गंभीर धाराओं में दो अलग-अलग मामले दर्ज हैं। बताया जा रहा है कि उनके कुछ सहयोगियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज की जा चुकी हैं। इसके बावजूद गोयनका पिछले डेढ़ से दो वर्षों से फरार बताए जा रहे हैं और अब तक उनकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
संरक्षण के आरोप और राजनीतिक लिंक
इस पूरे मामले में गोयनका को कुछ प्रशासनिक अधिकारियों और राजनीतिक व्यक्तियों से संरक्षण मिलने के आरोप भी सामने आए हैं। चर्चाओं में भूपेश बघेल का नाम भी उल्लेख किया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। इसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि कुछ लोगों के माध्यम से जनहित याचिकाएं (PIL) दायर कराई गईं और विभिन्न सरकारी विभागों में शिकायतें कराकर व्यावसायिक गतिविधियों को प्रभावित करने की कोशिश की गई।
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एनसीएलटी आदेश और वित्तीय अनियमितताएं
बताया जा रहा है कि मुंबई स्थित राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) के 9 मई 2025 के आदेश में महेंद्र गोयनका और उनकी पत्नी मीनू गोयनका से जुड़ी वित्तीय गड़बड़ियों का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा उनकी एक अन्य कंपनी ‘निसर्ग इस्पात’ में भी वित्तीय अनियमितताओं और धन के कथित हेरफेर की बातें सामने आई हैं।
