सोनम वांगचुक(Image- Social Media)
Supreme Court on Sonam Wangchuk: सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार, 12 फरवरी को लद्दाख के एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट में तीखी बहस देखने को मिली। केंद्र सरकार और लेह प्रशासन ने जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच के सामने अपनी दलीलें पूरी कीं और वांगचुक की हिरासत को उचित ठहराया। अपनी दलीलें समाप्त करने के बाद नटराज ने समय लेने के लिए अदालत से माफी भी मांगी, जिस पर कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में यह स्वाभाविक है। वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो की ओर से जवाबी दलीलों की सुनवाई के लिए मामले को सोमवार यानी आज 16 फरवरी के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज पेश हुए। उन्होंने अदालत में कहा कि वांगचुक की गिरफ्तारी के बाद लद्दाख में आंदोलन और हिंसा पर नियंत्रण हो गया, जिससे यह साबित होता है कि हिरासत का फैसला परिस्थितियों के मुताबिक सही था। उन्होंने यह भी दलील दी कि सीमावर्ती क्षेत्र में हालात संवेदनशील थे और देशहित सर्वोपरि होना चाहिए। उनके मुताबिक, अथॉरिटी ने वांगचुक को हिरासत में लेते समय पूरी सावधानी बरती।
सुनवाई के दौरान बेंच ने एएसजी से कहा कि अगर अदालत सवाल पूछे तो उन्हें आपत्ति नहीं होनी चाहिए। इस पर नटराज ने कहा कि अदालत के हर सवाल का जवाब देना उनका दायित्व है, चाहे वह प्रासंगिक हो या नहीं। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी वकील को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि बेंच का सवाल प्रासंगिक है या नहीं; यह फैसला अदालत ही करेगी।
पिछली सुनवाई में महात्मा गांधी के भाषण के हवाले पर आपत्ति जताई गई थी, लेकिन अदालत ने कहा कि उसे कोर्टरूम के बाहर की प्रतिक्रियाओं से कोई मतलब नहीं। इससे पहले, कोर्ट ने वांगचुक की खराब सेहत को देखते हुए केंद्र से हिरासत के फैसले की समीक्षा करने को कहा था, हालांकि स्वास्थ्य आधार पर रिहाई नहीं दी गई।
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सुनवाई के अंत में सोनम वांगचुक के वकील ने आरोप लगाया कि उन्हें दी गई पेन ड्राइव में चार कथित वीडियो मौजूद नहीं थे, जिनका उल्लेख दस्तावेजों में किया गया है। उन्होंने अदालत को बताया कि 5 अक्टूबर को दिए गए लैपटॉप में भी ये वीडियो नहीं थे। इस मुद्दे पर आगे सुनवाई के दौरान चर्चा होने की संभावना है।