'सोनम वांगचुक को महात्मा गांधी न बनाएं', 'सुप्रीम' सुनवाई में क्यों छाया रहा बापू का नाम; किसने जताया ऐतराज?

Sonam Wangchuk Case: लद्दाख के समाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से जुड़े मामले की बुधवार को हुई। इस सुनवाई में वांगचुक से ज्यादा महात्मा गांधी का नाम छाया रहा। ऐसा क्यों हुआ चलिए जानते हैं।
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कॉन्सेप्ट फोटो (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Sonam Wangchuk: लद्दाख के समाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से जुड़े मामले की बुधवार को हुई। इस सुनवाई में वांगचुक से ज्यादा महात्मा गांधी का नाम छाया रहा। केंद्र सरकार ने सोनम वांगचुक को महात्मा गांधी के तौर पर दिखाने की कोशिशों पर एतराज जताया। वांगचुक को लद्दाख में हिंसा के आरोप में नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत एहतियाती हिरासत में जोधपुर सेंट्रल जेल में रखा गया है।

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सोनम वांगचुक मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की कि NSA के तहत हिरासत में लिए गए व्यक्ति की तुलना महात्मा गांधी से न की जाए। इससे पहले जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने सोनम वांगचुक की हिरासत पर कहा था कि सरकार उनके बयानों को 'बढ़ा-चढ़ाकर' बता रही है।

जानिए सुप्रीम कोर्ट में क्या कुछ हुआ?

वैज्ञानिक और सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो की याचिका का विरोध करते हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराजन ने कहा कि वांगचुक ने नेपाल जैसे हिंसक विरोध प्रदर्शनों की चेतावनी दी थी। बेंच ने पूछा उन्होंने ऐसा कहां कहा? हमें दिखाएं।

कोर्ट रूम में हुई तीखी बहस

जवाब में बयान का संक्षिप्त हिस्सा पढ़े जाने पर कोर्ट ने पूरा संदर्भ पूछते हुए कहा कि पूरी बात पढ़ें। आप सिर्फ एक वाक्य नहीं पढ़ सकते। कोर्ट के मुताबिक, वांगचुक ने हिंसक तरीकों को 'चिंताजनक' बताया था और उनका स्वागत नहीं किया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कोई कहता है कि हिंसक तरीके सही नहीं हैं, तो इसे पूरे कॉन्टेक्स्ट में समझना चाहिए।

कोर्ट ने कोट की वांगचुक की लाइन

इसके बाद बेंच ने सोनम वांगचुक की एक लाइन कोट करते हुए कहा, "कुछ लोग महात्मा गांधी के शांति के रास्ते को छोड़ रहे हैं; यह चिंता की बात है।" बेंच ने इसे गांधी के सिद्धांतों पर जोर देने के तौर पर समझा और इसके हिंसा में बदलने की संभावना पर चिंता जताई।

'वांगचुक को गांधीवादी नहीं कह सकते'

ASG ने जवाब दिया कि वांगचुक को किसी खास वाक्य को अलग करके गांधीवादी नहीं कहा जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने पर्यावरण के नाम पर पब्लिक ऑर्डर को बिगाड़ने के लिए एक उपवास को उकसाया और ऑर्गनाइज किया। इस दौरान बेंच ने महात्मा गांधी के आखिरी उपवास का भी जिक्र किया और कहा कि उन्होंने शांति से मरने की बात कही थी, लेकिन उनकी हत्या के बाद सांप्रदायिक दंगे भड़क गए।

'राष्ट्रपिता से नहीं होनी चाहिए तुलना'

बाद में जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता कोर्ट रूम में पहुंचे तो उन्होंने गांधी के भाषण के जिक्र पर एतराज जताया। उन्होंने कहा, "हमें किसी ऐसी चीज़ का महिमामंडन नहीं करना चाहिए जो पूरी तरह से भारत विरोधी हो। हमें उनकी तुलना राष्ट्रपिता से नहीं करनी चाहिए। कल को यह हेडलाइन बन सकती है कि इस कोर्ट ने सोनम वांगचुक की तुलना महात्मा गांधी से कर दी।"

सॉलिसिटर जनरल ने बेंच को यह भी बताया कि वांगचुक की सेहत की वजह से रिहाई का मुद्दा सोशल मीडिया पर उठाया गया है। इस पर बेंच ने पूछा कि आप राई का पहाड़ क्यों बना रहे हैं? क्या आप चाहते हैं कि हम सवाल न पूछें? जिस पर मेहता ने जवाब दिया कि मैं ऐसा नहीं कह रहा हूं।

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