सुप्रीम कोर्ट। इमेज-सोशल मीडिया
Corruption Allegations Against Judges : देश की न्यायपालिका की जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर संसद में बेहद महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई है। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बताया कि 2016 से अब तक सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों के खिलाफ शिकायतों का अंबार लग गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 9 साल में जजों के खिलाफ 8630 शिकायतें दर्ज की गई हैं। चौंकाने वाली बात है कि पिछले चार वर्षों (वित्त वर्ष 2022 से लेकर 2025) के अंदर इन शिकायतों में 50 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
यह पूरा मामला तब सामने आया जब डीएमके (DMK) सांसद मथेश्वरन वीएस ने कानून मंत्री से पूछा था कि क्या उच्च न्यायपालिका में भ्रष्टाचार, कदाचार या यौन उत्पीड़न जैसी गंभीर शिकायतों को रिकॉर्ड करने की कोई व्यवस्था है। इसके जवाब में कानून मंत्री ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा साझा किए गए आंकड़ों को सदन के पटल पर रखा। रिपोर्ट के मुताबिक 2024 में सबसे अधिक शिकायतें दर्ज की गईं, जो पूर्व सीजेआई डॉ. डीवाई चंद्रचूड़ और पूर्व सीजेआई संजीव खन्ना के कार्यकाल के दौरान आईं।
संसद में इस बात पर भी चर्चा हुई कि क्या सरकार जजों के खिलाफ शिकायतों के लिए कोई नया सिस्टम बनाने जा रही है। इस पर कानून मंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में उच्च न्यायपालिका के सदस्यों के खिलाफ किसी भी शिकायत को कोर्ट के इन हाउस प्रोसीजर (आंतरिक प्रक्रिया) के तहत निपटाया जाता है। सरकार के CPGRAMS पोर्टल पर कोई शिकायत आती भी है तो उसे सीधे भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) या संबंधित हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भेज दिया जाता है। फिलहाल न्यायपालिका के भीतर जवाबदेही तय करने की शक्ति स्वयं जजों के पास ही है।
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जजों के खिलाफ शिकायतों में आया यह उछाल दो तरफ इशारा करता है। एक तरफ यह न्यायपालिका के अंदर भ्रष्टाचार की चिंताओं को गहराता है तो दूसरी तरफ यह भी दर्शाता है कि अब लोग अपनी शिकायतों को दर्ज कराने के प्रति अधिक जागरूक हुए हैं। वैसे, इन शिकायतों पर हुई कार्रवाई का विवरण अब भी एक जटिल विषय बना हुआ है। यह डेटा ऐसे समय में आया है जब देश में न्यायिक सुधारों और जजों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर लगातार बहस चल रही है।