NEET Paper Leak पर सुप्रीम कोर्ट ने NTA को फटकारा, पूछा- कैसे हुई गड़बड़ी, जिम्मेदारी तय होनी जरूरी
Supreme Court Hearing: NEET पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने NTA की कार्यप्रणाली पर सख्त सवाल उठाए। अदालत ने पूछा कि हाई पावर्ड कमेटी और सिफारिशों के बावजूद पेपर लीक जैसी घटना कैसे हुई।
- Written By: अर्पित शुक्ला
सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया (सोर्स- सोशल मीडिया)
Supreme Court on NEET Paper Leak: सुप्रीम कोर्ट ने नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में हुई गड़बड़ी को लेकर एनटीए (NTA) को कड़ी फटकार लगाई है। साथ ही नेशनल टेस्टिंग एजेंसी से सख्त सवाल भी पूछे गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए से पूछा कि यह गड़बड़ी कैसे हुई? इस दौरान सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कोर्ट के निर्देश के अनुसार, हलफनामा दाखिल कर दिया गया है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट की तरफ से डॉ. राधाकृष्णन से भी सवाल किए गए, जिनकी अध्यक्षता में एक्सपर्ट कमेटी बनी थी।
पेपर लीक मामले पर सुनवाई के दौरान जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि हमें अपने देश के युवाओं को निराश नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए बहुत बड़ा मानसिक तनाव है, क्योंकि इस परीक्षा के पीछे उनका बहुत सारा वक्त और भावनाएं दांव पर लगी रहती हैं।
कैसे हुई गड़बड़ी?
भारत सरकार की तरफ से अदालत को बताया गया कि एक्सपर्ट कमेटी के जो भी सुझाव और सिफारिशें थीं, उन्हें इसी साल लागू किया जाना था। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर एनटीए और डॉ. राधाकृष्णन से सवाल किया कि आप शुरू से ही इस एक्सपर्ट कमेटी का हिस्सा थे, फिर इन नियमों को लागू करने पर कितनी निगरानी रखी गई? आखिर यह गड़बड़ी हुई कैसे?
अदालत ने आगे कहा कि हाई-पॉवर कमेटी (HPC) की सिफारिशों और आपकी निगरानी के बावजूद अगर ऐसी चीज हो रही है तो फिर इसका मतलब है कि या तो सिफारिशों में ही कोई कमी थी, नहीं तो उनकी ठीक से निगरानी नहीं की गई है।
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आगे परीक्षाएं कैसे होंगी?
जस्टिस नरसिम्हा ने इस मामले पर कहा कि संबंधित मंत्रालय एक हलफनामा दाखिल करेगा। अदालत ने निर्देश दिया कि इसमें यह बताया जाएगा कि आगे से परीक्षाओं को किस तरह और किस प्रक्रिया के तहत पूरा कराया जाएगा। साथ ही, हलफनामे में ये भी साफ करना होगा कि संस्था को ठीक तरीके से चलाने के लिए अनुभवी विशेषज्ञों की नियुक्ति और एक मजबूत सिस्टम किस तरह तैयार किया जा रहा है।
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सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि हमारा मकसद यह सुनिश्चित करना है कि एनटीए तकनीकी और बौद्धिक दोनों रूप से इतना मजबूत हो कि 2024 या 2026 जैसी गड़बड़ियां भविष्य में न हों। अदालत ने 2 जुलाई से पहले हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा है।
