सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों पर सुनवाई (फोटो- सोशल मीडिया)
Supreme Court hearing on stray dogs: सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को आवारा कुत्तों के मुद्दे पर सुनवाई के दौरान माहौल काफी गर्म रहा। जब वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कुत्तों के प्रति क्रूरता न बरतने की दलील दी, तो जस्टिस संदीप मेहता ने तंज कसते हुए पूछा कि क्या हमें कुत्तों की काउंसलिंग करानी चाहिए कि वे किसी को न काटें। कोर्ट ने साफ कहा कि हम कुत्तों का दिमाग नहीं पढ़ सकते कि वे कब किसे काट लें। राजस्थान हाईकोर्ट के दो जजों के एक्सीडेंट का हवाला देते हुए कोर्ट ने सख्ती दिखाई है।
इस मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच कर रही है। एमिकस क्यूरी गौरव अग्रवाल ने बताया कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने एसओपी तैयार कर ली है और 1400 किमी का क्षेत्र संवेदनशील माना गया है। कोर्ट ने 7 नवंबर को ही आदेश दिया था कि स्कूल, अस्पताल और रेलवे स्टेशन जैसी जगहों से कुत्तों को हटाकर शेल्टर होम भेजा जाए। बेंच का मानना है कि सड़कों पर आवारा पशुओं से सिर्फ काटने का ही नहीं, बल्कि दुर्घटनाओं का भी बड़ा खतरा है।
सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने रेलवे को भी इस दायरे में लाने की मांग की। उन्होंने तर्क दिया कि सभी कुत्तों को पकड़कर शेल्टर में रखना मुमकिन नहीं है और हमें क्रूर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि समस्या का समाधान वैज्ञानिक तरीके से हो। इस पर जस्टिस मेहता ने कहा कि रोकथाम इलाज से बेहतर है। जब सिब्बल ने असम में रेलवे द्वारा इन्फ्रारेड ट्रैकिंग के इस्तेमाल का जिक्र किया, तो कोर्ट ने सवाल उठाया कि आप सुबह-सुबह किसी कुत्ते का मूड कैसे जान सकते हैं। कोर्ट ने यह भी बताया कि आवारा पशुओं के कारण राजस्थान हाईकोर्ट के एक जज अभी भी रीढ़ की हड्डी की चोट से जूझ रहे हैं, इसलिए यह मसला बेहद गंभीर है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।
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सुनवाई में यह बात सामने आई कि राज्य सरकारें कोर्ट के आदेश का पालन करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन उनके पास शेल्टर होम और नसबंदी केंद्रों की भारी कमी है। एमिकस क्यूरी ने जानकारी दी कि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और पंजाब जैसे बड़े राज्यों ने अभी तक अपना हलफनामा भी दाखिल नहीं किया है। एनिमल वेलफेयर बोर्ड का कहना है कि आबादी रोकने के लिए पहले मेल डॉग्स की नसबंदी जरूरी है। कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि हम सिर्फ यह देख रहे हैं कि नियमों का पालन हो रहा है या नहीं। जिन राज्यों ने जवाब नहीं दिया है, उनके खिलाफ अब सख्त कार्रवाई की जाएगी।