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छात्र प्रदर्शनों और हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा एजेंसियों को हिदायत, कहा- युवाओं की बात सुनना जरूरी

Supreme Court On Student's Protest: छात्र प्रदर्शनों और हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षा एजेंसियों को संयम बरतने की हिदायत दी है। CJI सूर्यकांत ने कहा कि युवाओं की बात सुनना ही सबसे बड़ी ताकत है।

  • Written By: अनन्या तिवारी
Updated On: Aug 05, 2026 | 01:29 PM

सुप्रीम कोर्ट, सांकेतिक फोटो (सोर्स-सोशल मीडिया)

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Supreme Court Hearing On Student Agitation: देश में बढ़ते छात्र विरोध प्रदर्शनों और हालिया हिंसा की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील टिप्पणी की है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने साफ तौर पर कहा है कि लोकतंत्र में युवाओं की आवाज को दबाना नहीं, बल्कि उसे सुनना जरूरी है। अदालत ने सुरक्षा एजेंसियों को सलाह दी है कि प्रदर्शनकारियों से निपटते समय ‘हिंसा का जवाब हिंसा’ से देने के बजाय अत्यधिक संयम और धैर्य का परिचय देना चाहिए।

संवाद ही समाधान है

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रशासन के रवैये पर जोर देते हुए कहा कि अधिकारियों को बहुत सावधानी से कदम उठाने की जरूरत है। अदालत का मानना है कि “सबसे बड़ी ताकत सुनना है, यह सुनना कि वे क्या कह रहे हैं और वे क्यों आंदोलन कर रहे हैं”। CJI ने सुरक्षा बलों को हिदायत दी कि शांतिपूर्ण मार्च के दौरान संयम बरतना अनिवार्य है, क्योंकि हिंसक जवाबी कार्रवाई स्थिति को सुलझाने के बजाय उसे और अधिक भड़का सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि युवाओं को समझाने-बुझाने और उन्हें शांत करने का सबसे असरदार तरीका उनकी बात सुनना ही है।

कॉकरोच जनता पार्टी पर कसा शिकंजा

सुप्रीम कोर्ट में यह चर्चा ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के खिलाफ दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान हुई। इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में CJP के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों के दौरान भारी हिंसा और पत्थरबाजी हुई है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे दिल्ली और अन्य राज्यों में छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी पहले से लंबित अन्य याचिकाओं के साथ जोड़ दिया है, ताकि सभी संबंधित मुद्दों पर एक साथ सुनवाई की जा सके।

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15 दिन बीत गए, जवाबदेही कहां है?

सुनवाई के दौरान एयरफोर्स के रिटायर्ड अधिकारियों की ओर से पेश हुए वकील ने आयोजकों की जवाबदेही पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने अदालत को बताया कि राष्ट्रीय राजधानी के हाई-सिक्योरिटी जोन में गड़बड़ी फैलाने वाले “तथाकथित आयोजक” 15 दिन बीत जाने के बाद भी खुलेआम टीवी चैनलों पर भड़काऊ बयान दे रहे हैं। याचिकाकर्ताओं का मुख्य सवाल यह था कि जहां पुलिस और मंत्रियों की जवाबदेही तय होती है, वहीं इन गैर-पंजीकृत संगठनों और उनके नेताओं की जवाबदेही कहां है, जो आग को बुझाने के बजाय उसे और हवा दे रहे हैं।

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सुरक्षा एजेंसियों के विवेक पर भरोसा

हालांकि अदालत ने संयम बरतने की सलाह दी, लेकिन साथ ही कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर अपना भरोसा भी जताया। पीठ ने स्पष्ट किया कि एजेंसियां अदालत से बेहतर जानती हैं कि जमीनी स्थिति से कैसे निपटना है। CJI सूर्यकांत ने कहा कि फिलहाल इस मामले को एजेंसियों के विवेक पर छोड़ देना चाहिए और अदालत अब तय तारीख पर इस मामले में केंद्र सरकार के रुख पर विचार करेगी।

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी आने वाले समय में छात्र आंदोलनों और पुलिसिया कार्रवाई के बीच एक नया संतुलन बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है। कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना ज़रूरी है, लेकिन युवाओं की शिकायतों को अनसुना करना लोकतंत्र के हित में नहीं है।

Supreme court cji surya kant student protests restraint

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Published On: Aug 05, 2026 | 01:29 PM

Topics:  

  • CJI Surya Kant
  • Students Protest
  • Supreme Court

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