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अब बिना इंश्योरेंस नहीं मिलेगा पेट्रोल, सुप्रीम कोर्ट का सरकार को सख्त निर्देश, जानें क्या है नया नियम

Vehicle Insurance Mandate: बिना इंश्योरेंस नहीं मिलेगा पेट्रोल, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को 'नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल' नियम लागू करने के निर्देश दिए। वाहनों की 56% आबादी बिना बीमा के दौड़ रही है।

  • Written By: अनन्या तिवारी
Updated On: Aug 05, 2026 | 09:20 AM

सांकेतिक फोटो (सोर्स-AI)

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No Insurance No Fuel Supreme Court Directive: अगर आप भी अपनी गाड़ी का इंश्योरेंस कराने में ढिलाई बरतते हैं, तो अब सावधान हो जाइए। देश की सर्वोच्च अदालत ने सड़क सुरक्षा को लेकर एक ऐसा क्रांतिकारी सुझाव दिया है, जो आपकी जेब और गाड़ी की रफ़्तार दोनों पर असर डाल सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह एक ऐसा पायलट प्रोजेक्ट तैयार करे, जिसके तहत ‘वैलिड इंश्योरेंस नहीं, तो पेट्रोल नहीं’ की व्यवस्था लागू की जा सके।

पेट्रोल पंप पर ही होगी इंश्योरेंस की जांच

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल’ का मॉडल पेश किया है। इस योजना के तहत इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (IRDAI) और सड़क परिवहन मंत्रालय (MoRTH) मिलकर काम करेंगे। योजना यह है कि पेट्रोल पंपों को गाड़ियों के इंश्योरेंस डेटा से जोड़ा जाए। यदि आपकी गाड़ी का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस खत्म हो चुका है, तो आपको पेट्रोल पंप पर तब तक ईंधन नहीं मिलेगा, जब तक आप उसका नवीनीकरण नहीं करा लेते।

देश में आधे से ज्यादा वाहन बिना इंश्योरेंस के

अदालत ने इस सख्त रुख के पीछे के चौंकाने वाले आंकड़े भी पेश किए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, भारत में कुल 30.48 करोड़ वाहनों में से लगभग 16.54 करोड़ वाहन यानी करीब 56 प्रतिशत गाड़ियां बिना इंश्योरेंस के सड़कों पर दौड़ रही हैं। इसका सबसे बुरा असर सड़क दुर्घटना के पीड़ितों पर पड़ता है, जिन्हें कानूनी पेचीदगियों और बीमा न होने के कारण समय पर मुआवजा नहीं मिल पाता। कोर्ट का मानना है कि इस नई व्यवस्था से वाहन मालिकों को इंश्योरेंस कराने के लिए मजबूर किया जा सकेगा।

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बदल गई इंश्योरेंस की अवधि, अब इतने साल का होगा बीमा

सुप्रीम कोर्ट ने न केवल नियमों को सख्त किया है, बल्कि थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की अनिवार्य अवधि को भी बढ़ा दिया है। चार पहिया वाहनों के लिए थर्ड-पार्टी बीमा की अवधि 3 साल से बढ़ाकर 4 साल कर दी गई है। वहीं दोपहिया वाहनों लिए यह अवधि 5 साल से बढ़ाकर 6 साल कर दी गई है। कोर्ट ने IRDAI को इस संबंध में तत्काल निर्देश जारी करने को कहा है ताकि सड़क सुरक्षा के हितों की रक्षा की जा सके।

हाइवे पर लगेंगे स्मार्ट कैमरे, कटेगा ऑनलाइन चालान

बिना इंश्योरेंस वाले वाहनों की पहचान के लिए अब तकनीक का सहारा लिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि टोल प्लाजा और मुख्य सड़कों पर ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरे लगाए जाएं। ये कैमरे सीधे ‘वाहन’ पोर्टल और बीमा सूचना ब्यूरो से जुड़े होंगे। जैसे ही कोई बिना इंश्योरेंस वाला वाहन इन कैमरों की नजर में आएगा, उसका ऑटोमेटिक ई-चालान कट जाएगा। इससे पुलिस को मौके पर गाड़ी रोकने की जरूरत नहीं पड़ेगी और नियमों का पालन भी सुनिश्चित होगा।

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पीड़ितों को न्याय दिलाना प्राथमिकता

यह पूरा मामला तेलंगाना हाईकोर्ट के एक फैसले को बरकरार रखते हुए सामने आया, जिसमें दुर्घटना में जान गंवाने वाले एक व्यक्ति के परिवार को मुआवजे का आदेश दिया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनिवार्य बीमा का उद्देश्य केवल कानूनी प्रक्रिया पूरी करना नहीं, बल्कि दुर्घटना पीड़ितों को लंबी कानूनी लड़ाई से बचाना और उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। सभी संबंधित विभागों को 14 अगस्त तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया है और अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।

Supreme court no insurance no fuel rule third party insurance duration extended

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Published On: Aug 05, 2026 | 09:20 AM

Topics:  

  • Insurance
  • Supreme Court

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