हमारे देश में करोड़ों गरीब, घुसपैठियों के लिए रेड कार्पेट… रोहिंग्या मुद्दे पर भड़के CJI सूर्यकांत
Supreme Court के प्रधान न्यायाधीश ने Rohingya मामले पर सुनवाई के दौरान घुसपैठ को लेकर तल्ख टिप्पणी कर डाली। भारत में ही करोड़ों लोग गरीब है। उन्होंने सरकार से शरणार्थी शब्द को लेकर कड़ा सवाल पूछ लिया।
- Written By: सौरभ शर्मा
सुप्रीम कोर्ट रोहिंग्या सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत घुसपैठिया पर तल्ख बयान
CJI Surya Kant Statement on Rohingya: सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को रोहिंग्याओं के मुद्दे पर बेहद तीखी बहस देखने को मिली। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान सख्त लहजे में पूछा कि क्या अवैध रूप से आने वाले घुसपैठियों के स्वागत में हमें रेड कार्पेट बिछाना चाहिए? उन्होंने साफ कहा कि भारत में पहले से ही करोड़ों गरीब लोग हैं जो देश के नागरिक हैं। क्या उन्हें सुविधाएं नहीं मिलनी चाहिए? यह टिप्पणी तब आई जब अदालत रोहिंग्याओं से जुड़ी एक याचिका सुन रही थी, जिसमें उनके अधिकारों और कानूनी स्थिति पर सवाल उठाए गए थे।
यह मामला तब शुरू हुआ जब कोर्ट एक हैबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसमें दावा किया गया था कि दिल्ली पुलिस ने कुछ रोहिंग्याओं को हिरासत में लिया है और अब उनका पता नहीं चल रहा। इस पर सीजेआई ने केंद्र सरकार से सीधा सवाल किया कि क्या आपके पास इन्हें ‘शरणार्थी’ मानने का कोई आधिकारिक आदेश है? कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ‘शरणार्थी’ कानून की नजर में एक परिभाषित शब्द है। अगर कोई बिना दस्तावेजों के घुसपैठ करता है, तो उसे यहां रखना हमारी मजबूरी नहीं है। अदालत ने पूछा कि जिसका कोई कानूनी दर्जा ही नहीं है, उसे हम देश में क्यों रखें?
अवैध तरीके से प्रवेश और अधिकारों की बात
सीजेआई ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि पहले लोग सुरंग खोदकर या बाड़ काटकर देश में अवैध रूप से घुसते हैं। इसके बाद वे कहते हैं कि हम आ गए हैं, अब हमें भारत के कानून के तहत खाना, रहना और शिक्षा मिले। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हम कानून को इस तरह नहीं खींच सकते। हमारे देश के गरीबों पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी माना कि किसी घुसपैठिए को भी टॉर्चर नहीं किया जाना चाहिए। वहीं, याचिकाकर्ता की वकील ने सफाई दी कि वे केवल कानूनी प्रक्रिया के पालन की मांग कर रही हैं, न कि विशेष अधिकारों की।
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भारत दुनिया की धर्मशाला नहीं
सुनवाई के दौरान पुरानी टिप्पणियों का भी जिक्र आया कि भारत दुनिया की धर्मशाला नहीं बन सकता जहां हर कोई चला आए। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका के तरीके पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह जनहित याचिका है लेकिन किसी पीड़ित ने इसे दायर नहीं किया है। कोर्ट ने माना कि बिना कानूनी दर्जे वाले विदेशियों का मुद्दा संवेदनशील है और इसमें कई पेचीदा चीजें शामिल हैं। अदालत ने संकेत दिया कि इस मामले को अन्य जुड़ी हुई याचिकाओं के साथ विस्तार से सुना जाएगा ताकि एक समग्र फैसला लिया जा सके।
