SIR पूरी तरह सही…वोटर लिस्ट विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, कहा, EC को नाम जोड़ने और काटने का अधिकार
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण की वैधता को सही ठहराया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने चुनाव आयोग की शक्तियों को बरकरार रखते हुए याचिकाएं खारिज कीं।
- Written By: अक्षय साहू
सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया (सोर्स- सोशल मीडिया)
Supreme Court Verdict on Bihar SIR Case: सुप्रीम कोर्ट ने आज बिहार में विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया की संवैधानिक वैधता के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने माना कि, मतदाता सूची में नाम जोड़ना या घटना को लेकर चुनाव आयोग मिली शक्तियां संवैधानिक रूप से सही हैं। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने मामले दाखिल सभी याचिकों को खाजिर करते हुए चुनाव आयोग की शक्तियों को बरकरार रखा है।
जस्टिस सूर्यकांत ने फैसला सुनाते कहा कि, बिहार में चल रही विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रिया संविधान से उस मूल दायित्व से अलग नहीं है, जिसका संबंध स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराए जाने से है। कोर्ट ने माना कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची में शुद्धता जांचने के लिए इस प्रकार की प्रक्रिया चलाने का पूर्ण अधिकार है।
Supreme Court upholds the decision of Election Commission of India’s (ECI) to undertake Special Intensive Revision (SIR) of voter rolls that started in Bihar. A bench led by CJI Surya Kant has held that the SIR exercise cannot be struck down as ultra vires (illegal) just… pic.twitter.com/YLBr1V8bF4 — ANI (@ANI) May 27, 2026
सम्बंधित ख़बरें
लालू यादव के पोते का जन्मदिन: गाजियाबाद में विपक्षी एकता का शक्ति प्रदर्शन, तेज प्रताप-रोहिणी भी आएंगे?
Supreme Court Verdict: SIR पर आज सुप्रीम फैसला, तय होंगी चुनाव आयोग की शक्तियां, कई राज्यों पर पड़ेगा असर
बिहार पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा स्थगित, अब 21 जून की जगह 28 जून को होगा एग्जाम
बिहार में तेजस्वी यादव को बड़ा झटका, RJD छोड़ भाजपा में शामिल हुईं रितु जायसवाल; समर्थकों ने भी पहना भगवा गमछा
चुनाव आयोग को SIR का पूरा अधिकार
जस्टिस सूर्यकांत ने मामले पर फैसला सुनाते हुए कहा कि कोर्ट ने SIR अधिसूचना से जुड़े विवाद के प्रमुख मुद्दों को समझने के लिए तीन अहम सवाल तय किए थे और उन्ही के आधार पर मामले का परीक्षण किया गया। तीन प्रमुख सवाल इस प्रकार थे।
पहला प्रश्न: क्या चुनाव आयोग को SIR कराने का अधिकार है?
दूसरा प्रश्न: क्या यह प्रक्रिया किसी वैध उद्देश्य पर आधारित है?
तीसरा प्रश्न: क्या इसके तहत अपनाए गए उपाय संतुलित एवं कानून के अनुकूल हैं?
अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 21(3) चुनाव आयोग को मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण की शंक्तियां देते हैं। कोर्ट ने कहा कि, बिहार में बड़े पैमाने पर जनसंख्या में बदलाव, शहरीकरण और प्रवासन की वजह से मतदाता सूची में व्यापक बदलाव हुए हैं। जिसके चलते चुनाव आयोग ने बिहार में SIR की प्रक्रिया की।
यह भी पढ़ें- पिनाराई विजयन के घर छापेमारी पर भड़की मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भाजपा और कांग्रेस की बताई मिलीभगत
मतदाता सूची की शुद्धता लोकतंत्र की बुनियादी शर्त
बेंच ने आगे कहा कि, चुनाव आयोग का चुनावी प्रक्रिया की अखंडता को बराकरार रखते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव करवाना है। आयोग ने अपने इसी संवैधानिक दायित्व को निभाते हुए बिहार में SIR प्रक्रिया शुरु करने का फैसला किया। इसके अलावा कोर्ट ने यह भी माना कि, SIR अभियान चलाया जाना चुनावी प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए उठाया गया कदम है और यह किसी भी प्रकार से संविधान के मूल ढांचे के विरुद्ध नहीं जाता है। अदालत के अनुसार मतदाता सूची की शुद्धता लोकतंत्र की पहली बुनियादी शर्त है और चुनाव आयोग को इस दिशा में फैसले लेने का पूर्ण अधिकार है।
