वो बाबा जिन्होंने बदनाम किया 'चोला', इमेज सोर्स- AI
Religious Leaders Exploitation News: भारत में धर्म और आस्था के बीच अक्सर विवादों का साया पड़ता रहा है। हाल ही में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर लगे यौन शोषण के आरोपों ने एक बार फिर देश में ‘धर्मगुरुओं और कानून’ की बहस को जन्म दे दिया है। पुलिस प्रशासन अब साक्ष्य जुटाने में लगा है, लेकिन यह भारत में अपनी तरह का कोई पहला मामला नहीं है।
हाल ही में प्रयागराज पुलिस ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद के खिलाफ यौन शोषण के गंभीर आरोपों में जांच की गति बढ़ा दी है। डीसीपी मनीष कुमार शांडिल्य के नेतृत्व में गठित 5 सदस्यीय विशेष टीम ने माघ मेला शिविर का दौरा कर ‘नक्शा नजरी’ तैयार किया है। साथ ही पुलिस उन दो पीड़ितों के बयान दर्ज करने और उनका मेडिकल परीक्षण कराने की तैयारी में है, जिन्होंने कोर्ट के आदेश पर FIR दर्ज कराई है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि उनके मठ के दरवाजे पुलिस के लिए खुले हैं और वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे।
हालांकि, यह मामला अब उस लंबी फेहरिस्त में जुड़ गया है जहां आस्था के केंद्रों पर शोषण के आरोप लगे हैं। इसके पहले भी कई बार ऐसा हुआ कि कई बाबाओं और संतों पर गंभीर आरोप लगाए गए। कभी ये आरोप सच साबित हुए तो कभी ये सिर्फ आरोप बनकर रह गए। पढ़िए इसके पहले किन बाबाओं को ‘गंदे कामों’ के लिए सजा काटनी पड़ी है।
धर्मगुरुओं के कानूनी पतन की जब भी बात होती है, गुरमीत राम रहीम का नाम प्रमुखता से आता है। 25 अगस्त 2017 को सीबीआई की एक विशेष अदालत ने राम रहीम को दो साध्वियों के साथ बलात्कार का दोषी पाया और उसे 20 साल की जेल की सजा सुनाई। इस मामले की शुरुआत 2002 में एक अनाम पत्र से हुई थी, जिसमें साध्वियों ने अपने शोषण की कहानी बयां की थी।
राम रहीम पर न केवल बलात्कार, बल्कि पत्रकार राम चंद्र छत्रपति और डेरा प्रबंधक रणजीत सिंह की हत्या के भी आरोप लगे, जिनमें उसे उम्रकैद की सजा हुई (हालांकि बाद में कुछ मामलों में उसे ऊपरी अदालत से राहत मिली)। इसके अलावा, उन पर 400 अनुयायियों के जबरन बधियाकरण का आदेश देने का भी संगीन आरोप है।
देश के सबसे प्रभावशाली गुरुओं में शुमार रहे आसाराम बापू का पतन साल 2013 में शुरू हुआ। जोधपुर की एक जेल के अंदर सुनवाई करते हुए अदालत ने उन्हें एक 16 वर्षीय किशोरी के साथ बलात्कार का दोषी पाया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। पीड़िता का परिवार एक दशक से अधिक समय से उनका अनुयायी था।
आसाराम के देशभर में 230 से अधिक आश्रम थे और उनका राजनीतिक प्रभाव भी अत्यंत व्यापक था। उनके इस मामले ने देश में पॉक्सो (POCSO) एक्ट और नाबालिगों की सुरक्षा पर एक बड़ी बहस छेड़ी थी।
आसाराम का बेटा नारायण साईं भी अपने पिता की तरह ही दुष्कर्म के मामले में जेल की सजा काट रहा है। सूरत की दो बहनों ने साल 2013 में पिता-पुत्र की जोड़ी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। छोटी बहन ने नारायण साईं पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे, जिसके बाद सूरत की सत्र न्यायालय ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। यह मामला दर्शाता है कि कैसे कुछ आश्रमों में एक पूरा तंत्र ही शोषण के कार्य में लिप्त पाया गया।
स्वयंभू धर्मगुरु नित्यानंद का मामला सबसे अधिक चर्चा में रहा क्योंकि वे भारतीय कानून की पकड़ से भाग निकला। 2010 में एक अभिनेत्री के साथ उनकी आपत्तिजनक वीडियो वायरल होने के बाद उन पर बलात्कार और अपहरण जैसे कई मामले दर्ज हुए। एक अमेरिकी शिष्या ने भी उस पर 5 साल तक बार-बार बलात्कार करने का आरोप लगाया था। गिरफ्तारी से बचने के लिए नित्यानंद 2019 में भारत से भाग गए और बाद में दावा किया कि उन्होंने ‘यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ कैलासा’ नाम से अपना एक अलग द्वीप राष्ट्र बसा लिया है। वर्तमान में वे भारतीय अदालतों द्वारा भगोड़ा घोषित हैं।
हरियाणा के संत रामपाल का मामला किसी युद्ध से कम नहीं था। जब पुलिस उसे गिरफ्तार करने पहुंची, तो उनके अनुयायियों ने पुलिस से हिंसक मुकाबला किया। गिरफ्तारी के बाद जब आश्रम की तलाशी ली गई, तो वहां अवैध हथियार, आपत्तिजनक दवाएं और गर्भपात कराने के सबूत मिले। रामपाल पर देशद्रोह और शारीरिक शोषण के कई मामले दर्ज किए गए।
इसी कड़ी में दिल्ली के ‘इच्छाधारी बाबा’ स्वामी भीमानंद का नाम भी आता है, जो कभी होटल में सिक्योरिटी गार्ड था। बाद में वह धर्मगुरु बनकर उभरा, लेकिन पुलिस जांच में पता चला कि वह देह व्यापार का एक बड़ा रैकेट चला रहा था। उस पर मकोका (MCOCA) जैसा सख्त कानून लगाया गया था।
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अविमुक्तेश्वरानंद का मामला अभी जांच के दायरे में है और पुलिस साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई कर रही है। अविमुक्तेश्वरानंद ने हाल ही में कहा, “अगर पुलिस हमें अरेस्ट करने के लिए एक्शन भी लेती है तो भी हम उनका विरोध नहीं करेंगे। हम कोऑपरेट करेंगे। जनता सब देख रही है। झूठ सामने आ ही जाता है। ये कहानी भी झूठी साबित होगी, आज नहीं तो कल, कल नहीं तो परसों।”