15 जुलाई को धरती पर लौटेंगे शुभांशु शुक्ला, रिहैब सेंटर में गुजारेंगे सात दिन
भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला 15 जुलाई को धरती पर वापस लौट रहे हैं। नासा के अनुसार शुभांशु कैलिफोर्निया तट पर स्प्लैशडाउन करेंगे। उनको सात दिन रिहैब सेंटर में भी गुजारने होंगे।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
शुभांशु शुक्ला (फोटो: सोशल मीडिया)
नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर 18 दिनों तक रहने के बाद पृथ्वी पर वापस लौट रहे हैं। एक्सिओम-4 मिशन में शुभांशु शुक्ला और तीन अंतरिक्ष यात्री कमांडर पैगी व्हिटसन, स्लावोज उज्नान्स्की-विस्नीव्स्की और टिबोर कापू शामिल हैं। शुभांशु शुक्ला 15 जुलाई को धरती पर लौटेंगे।
15 जुलाई को लौट रहे हैं कैप्टन शुभांशु
भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला 18 दिन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर बिताने के बाद 15 जुलाई को पृथ्वी पर लौटेंगे। वो अमेरिका के कैलिफोर्निया तट के पास समुद्र में स्प्लैशडाउन के जरिए वापसी करेंगे। नासा के अनुसार 14 जुलाई शाम 4 बजकर 35 मिनट पर वे ISS से रवाना हो जाएंगे और अगले दिन दोपहर में करीब 3 बजे पृथ्वी पर उतरेंगे। इस यात्रा के बाद उन्हें पृथ्वी के वातावरण के अनुकूल होने के लिए 7 दिन तक रिहैबिलिटेशन में रखा जाएगा।
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ISRO ने जानकारी दी कि शुभांशु के लौटने के बाद उनको 7 दिनों के पुनर्वास कार्यक्रम से गुजरना होगा। ये सबकुछ उनको पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण शक्ति के अनुसार ढालने के लिए किया जाएगा। इन सात दिनों में इसरो के फ्लाइट सर्जन शुक्ला की शारीरिक और मानसिक स्थिति की निगरानी करेंगे। सात दिन बाद उनको छुट्टी मिल सकेगी।
स्वास्थ्य बेहतर और जोश हाई
शुभांशु शुक्ला की यात्रा एक्सिओम स्पेस द्वारा संचालित कमर्शियल मिशन एक्सिओम 4 (Axiom 4) का हिस्सा थी, जिसमें उनके साथ तीन अन्य अंतरिक्ष यात्री- कमांडर पैगी व्हिटसन, पोलैंड के स्लावोज उज्नान्स्की-विस्नीव्स्की और हंगरी के टिबोर कापू भी शामिल थे। ये सभी 26 जून को ISS पहुंचे थे।
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इसरो के अनुसार, शुक्ला का स्वास्थ्य बिल्कुल ठीक है और उनका उत्साह उच्च स्तर पर है। वे अपने साथ 580 पाउंड से अधिक वैज्ञानिक सामग्री, नासा का तकनीकी उपकरण और 60 से ज्यादा वैज्ञानिक प्रयोगों के आंकड़े पृथ्वी पर वापस ला रहे हैं।
60 से ज्यादा वैज्ञानिक प्रयोगों के आंकड़े लाएगी टीम
अंतरिक्ष में शुक्ला ने कई वैज्ञानिक अध्ययनों में भाग लिया। उन्होंने माइक्रोएल्गी प्रयोग पर काम किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने मस्तिष्क की गतिविधि, आंखों की गति और अंतरिक्ष में शरीर के प्रतिक्रिया व्यवहार से संबंधित परीक्षणों में हिस्सा लिया। इन अध्ययनों में अंतरिक्ष यात्रियों के मानसिक स्वास्थ्य, मस्तिष्क में रक्तप्रवाह और विकिरण के प्रभाव का टेस्ट किया गया।
