

Farmers Protest Against Agriculture Centers In Yavatmal: मारेगांव तहसील के कृषि केंद्रों पर कीटनाशक दवाओं की कीमतों में भारी अंतर सामने आने से किसानों में नाराजगी है। एक ही कंपनी की एक ही दवा अलग-अलग कृषि केंद्रों पर अलग-अलग कीमत में बेचे जाने का मामला उजागर हुआ है, जिससे कृषि विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, एक युवा किसान खरपतवारनाशक (कीटनाशक) दवा खरीदने के लिए मारेगांव के एक कृषि केंद्र पर पहुंचा। वहां उसे संबंधित दवा की कीमत 1,300 रुपये प्रति लीटर बताई गई। किसान को संदेह होने पर उसने दवा के डिब्बे का फोटो लेकर दूसरे कृषि केंद्र संचालक को व्हाट्सएप (WhatsApp) के माध्यम से भेजा। दूसरे केंद्र से उसी दवा की कीमत 950 रुपये प्रति लीटर बताई गई। एक ही दवा के दाम में 350 रुपये प्रति लीटर का अंतर देखकर किसान हैरान रह गया।
इसके बाद उसने पहले कृषि केंद्र संचालक से अधिक कीमत का कारण पूछा। संचालक ने संबंधित कंपनी के एमआर (मार्केटिंग प्रतिनिधि) से फोन पर बात कराई। एमआर ने बताया कि उधारी पर कम मात्रा में खरीदी गई दवा की कीमत अधिक पड़ती है, जबकि अधिक मात्रा में खरीदारी करने वाले कृषि केंद्रों को बिलिंग में कम दर मिलती है। हालांकि किसानों का कहना है कि थोक खरीद और खुदरा बिक्री के नाम पर मनमाने दाम वसूलना उचित नहीं है। यदि एक ही दवा अलग-अलग दुकानों पर अलग-अलग कीमत में बेची जा रही है, तो इसका सीधा आर्थिक बोझ किसानों पर पड़ता है।
मारेगांव के युवा किसान विशाल किन्हेंकार ने कहा है कि कृषि केंद्र धारकों को दिए गए कृषि सामग्री की कीमतें भले ही उधार या नगद का विषय हों, यह उनके डीलर एवं कृषि केंद्र धारक का विषय है। इसमें अलग-अलग कीटनाशक के औषधि के रेट हैं। जैसे 1 लीटर सेम औषधि कहीं 950, तो कहीं 1,300, 1,150 ऐसे है। सारे कृषि दुकानों में एक ही जैसे रेट बोर्ड होने चाहिए। कृषि विभाग में सारे कृषि केंद्रों में स्टॉक एवं सारी कंपनी के डिब्बों की नोंद रहना जरूरी है। कहीं कम कहीं ज्यादा कीमतें यानी किसानों की आर्थिक परिस्थिति से खिलवाड़ है।"
मारेगांव तहसील के युवा किसान नवाज शरीफ ने कहा है कि कल हरे कचरे को फवारनी पंप से मारने हेतु एक कृषि केंद्र में औषधि खरीदारी के लिए गया। जहां 1,300 रुपए लीटर बताया गया, वही औषधि दूसरे-तीसरे दुकान में इससे कम कीमत में उपलब्ध रहने की बात देखने को मिली, जिससे यह पता चल रहा है कि कृषि विभाग का क्वालिटी कंट्रोल स्क्वाड सिर्फ कागजों पर चल रहा है। जिसका कृषि केंद्र धारकों पर कोई नियंत्रण नहीं है। जिस वजह से किसानों की आर्थिक लूट मची हुई है।
मारेगांव तहसील कृषि अधिकारी दीपाली खवले ने कहा है कि जिस भी किसान के साथ यह प्रकार घटित हुआ है, उस किसान ने लिखित में कृषि विभाग से शिकायत करनी चाहिए। क्वालिटी कंट्रोल स्क्वाड को कृषि केंद्रों पर भेजकर इस बाबत जांच की जाएगी। दोषी पाए जाने पर कार्रवाई भी की जाएगी।