Shivaji Jayanti 2025: छत्रपति शिवाजी की तरह ही संभाजी की है वीरगाथा, जानें पिता को औरंगजेब की कैद से कैसे छुड़ाया

शिवाजी ने संभाजी को पढ़ाने के लिए कई शिक्षक नियुक्त किए थे। ऐसे में संभाजी ने संस्कृत में महारत हासिल की। सन 1670 के बाद, शिवाजी ने उन्हें प्रशासनिक कार्यों में शामिल करना शुरू कर दिया।
Shivaji Jayanti 2025: छत्रपति शिवाजी की तरह ही संभाजी की है वीरगाथा, जानें पिता को औरंगजेब की कैद से कैसे छुड़ाया
छत्रपति शिवाजी और उनके बेटे संभाजी, फोटो - सोशल मीडिया
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नवभारत डेस्क : संभाजी महाराज, छत्रपति शिवाजी महाराज, के बड़े बेटे, केवल दो साल के थे जब उनकी मां का निधन हुआ था। वे अपने पिता शिवाजी और दादी जीजाबाई की देखरेख में बड़े हुए। जब शिवाजी को औरंगजेब ने आगरा में बंदी बना लिया था, तो वे उनके साथ थे और बच निकलने में भी उनकी मदद की थी।

शिवाजी ने संभाजी को पढ़ाने के लिए कई शिक्षक नियुक्त किए थे। ऐसे में संभाजी ने संस्कृत में महारत हासिल की। सन 1670 के बाद, शिवाजी ने उन्हें प्रशासनिक कार्यों में शामिल करना शुरू कर दिया। हालांकि, शिवाजी के परिवार में तनाव बढ़ने लगा, खासकर उनकी पत्नी सोयराबाई चाहती थीं कि संभाजी के बजाय उनके छोटे बेटे राजाराम को उत्तराधिकारी बनाया जाए।

जब शिवाजी बीमार पड़े, तो संभाजी के आचरण को लेकर फैलने लगीं अफवाहें

1676 में, जब शिवाजी बीमार पड़े, तो संभाजी के आचरण को लेकर अफवाहें फैलने लगीं, जिनका स्रोत उनकी सौतेली मां सोयराबाई थीं। 1678 में जीजाबाई की मृत्यु के बाद संभाजी ने पेड़गांव में मुगल गवर्नर दिलेर खान से संपर्क किया। लेकिन बाद में संभाजी को दिलेर खान की क्रूर नीतियों से नफरत हो गई, और 1679 में वे मुगल शिविर से भागकर बीजापुर पहुंचे।

शिवाजी की मृत्यु के बाद, 1680 में संभाजी ने अपने सौतेली मां सोयराबाई को मौत की सजा दी, यह आरोप लगाकर कि उन्होंने शिवाजी को जहर दिया था। 1681 में, औरंगजेब ने दक्षिण भारत पर आक्रमण शुरू किया। 1689 में संभाजी को मुगल पकड़कर लाए गए और उनकी भयानक यातनाएं दी गईं। उनका सिर काटकर उसे पूरे शहर में घुमाया गया।

इस घटना के बाद, शिवाजी के छोटे बेटे राजाराम को राजा बनाया गया। हालांकि, औरंगजेब ने उनका पीछा किया, और राजाराम की पत्नी ताराबाई ने औरंगजेब के खिलाफ संघर्ष जारी रखा। 1699 में, राजाराम की मृत्यु हो गई, लेकिन ताराबाई ने संघर्ष को जारी रखा।

औरंगजेब ने दिया था ये आदेश

सन् 1681 से 1682 के बीच औरंगजेब ने अपना दक्षिण भारत का अभियान शुरू कर सभी चुनौतियों को समाप्त करने का बीड़ा उठाया। उसने बीजापुर और गोलकुंडा पर कब्ज़ा कर वहां के राजाओं को बंदी बना लिया। सन् 1689 में रत्नागिरी में संगमेश्वर में संभाजी को भी बंदी बना लिया गया।

संभाजी से औरंगजेब के सामने सिर झुकने के लिए कहा गया लेकिन संभाजी ने ऐसा करने से इनकार करते हुए औरंगजेब को घूरना शुरू कर दिया। औरंगजेब ने उसी रात संभाजी की आंखें निकालने का आदेश दिया था।

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