पटना हाईकोर्ट। इमेज-सोशल मीडिया
Bihar Political News : बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल और आशंका के बादल मंडराने लगे हैं। नवंबर 2025 के विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत हासिल करने वाले एनडीए गठबंधन और विपक्ष के कई विधायकों की कुर्सी अब पटना हाईकोर्ट की चौखट पर फंसती नजर आ रही है।
हाईकोर्ट ने बिहार के 42 विधायकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इनमें विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार से लेकर नीतीश सरकार के कई कद्दावर मंत्रियों के नाम शामिल हैं।
यह पूरा मामला 2025 के विधानसभा चुनाव के दौरान दाखिल किए गए शपथ पत्रों (Affidavits) से जुड़ा है। चुनाव हारने वाले विभिन्न प्रत्याशियों ने पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि जीतने वाले इन 42 माननीय सदस्यों ने अपनी संपत्ति, आपराधिक रिकॉर्ड या शैक्षणिक योग्यता के बारे में गलत या भ्रामक जानकारी दी है। सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि कुछ विधायकों ने तो शपथ पत्र के कई कॉलम पूरी तरह खाली (Blank) छोड़ दिए थे, इसके बावजूद निर्वाचन अधिकारियों ने उनका नामांकन स्वीकार कर लिया।
अदालत के इस नोटिस ने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों खेमों में खलबली मचा दी है। जिन दिग्गजों को जवाब देना है, उनमें प्रमुख नाम निम्नलिखित हैं:
प्रेम कुमार : विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर)
विजेंद्र यादव : ऊर्जा मंत्री
जीवेश मिश्रा : पूर्व मंत्री
चेतन आनंद : जदयू विधायक
अमरेंद्र प्रसाद : राजद विधायक (गोह)
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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणामों में NDA को 202 सीटें मिली थीं, जबकि महागठबंधन को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी। अब इन याचिकाओं के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या इन नेताओं की सदस्यता रद्द हो जाएगी? कानूनी जानकारों के मुताबिक हाईकोर्ट यह पाता है कि हलफनामे में दी गई जानकारी जानबूझकर छिपाई गई या गलत थी तो जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत उनकी सदस्यता रद्द की जा सकती है। फिलहाल कोर्ट ने इन सभी को साक्ष्यों के साथ अपना पक्ष रखने का समय दिया है। समीक्षा के इस दौर में बिहार की राजनीति वेट एंड वॉच की स्थिति में है। यदि इनमें से बड़ी संख्या में विधायकों पर गाज गिरती है तो राज्य में उपचुनावों की झड़ी लग सकती है।