कॉन्सेप्ट फोटो (डिजाइन)
Congress on PM Modi: मिडिल ईस्ट संकट और इजरायल-अमेरिका और ईरान के शुरू हुए महासंग्राम के बीच भारत में सियासी पारा चढ़ चुका है। देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस पार्टी ने भारत की फॉरेन पॉलिसी को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला किया है और ईरान संकट पर उसके रिस्पॉन्स पर सवाल उठाए हैं।
सीनियर कांग्रेस लीडर जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा, “प्रधानमंत्री और उनके साथी कितना भी दिखावा करें, असलियत यह है कि खुद को दुनिया का लीडर कहने वाले के नेतृत्व में भारत की फॉरेन पॉलिसी पूरी तरह से एक्सपोज हो गई है।” उन्होंने आगे कहा कि देश प्रधानमंत्री मोदी की फॉरेन पॉलिसी के कंटेंट और तरीकों दोनों की भारी कीमत चुका रहा है।
अमेरिका के राष्ट्रपति पाकिस्तान के साथ अपनी करीबी बनाए हुए हैं और बार-बार उसी व्यक्ति की तारीफ करते हैं जिसके भड़काऊ बयानों ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमलों की नींव रखी थी। अमेरिका ने ने साफ तौर पर अफगानिस्तान के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान का साथ दिया है।
डोनाल्ड ट्रंप अब तक 100 से ज़्यादा बार दावा कर चुके हैं कि उन्होंने 10 मई 2025 को इंडियन एक्सपोर्ट पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी देकर ऑपरेशन सिंदूर को रोकने के लिए दखल दिया। हालांकि, प्रधानमंत्री इन दावों पर पूरी तरह चुप रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर को रोकने का पहला ऐलान अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो ने 10 मई 2025 को शाम 5:37 बजे किया था।
इससे पहले 2 फरवरी 2026 को ट्रंप ने ऐलान किया कि प्रधानमंत्री के कहने पर इंडिया-US ट्रेड एग्रीमेंट फाइनल हो गया है और यह तुरंत लागू होगा। साफ है यह पीएम मोदी का एक हताशा भरा कदम था। अठारह दिन बाद अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ऐलान किया कि इंडिया-US ट्रेड एग्रीमेंट की बुनियाद रही ट्रंप की टैरिफ स्ट्रैटेजी गैर-कानूनी और असंवैधानिक है। इस फैसले की काफी उम्मीद थी, लेकिन पीएम मोदी ने ट्रंप पर इसे पहले ऐलान करने का दबाव डाला।
यह भी पढ़ें: इजरायल-अमेरिका ने ईरान पर किया हमला…तो पीएम मोदी पर बरस पड़े ओवैसी, पूछ लिया ‘बवंडर’ मचाने वाला सवाल
इस ट्रेड एग्रीमेंट को अब बड़े पैमाने पर एकतरफा माना जा रहा है, जिसमें भारत ने इम्पोर्ट, खासकर खेती के प्रोडक्ट्स के इम्पोर्ट को काफी आसान बनाने के पक्के वादे किए हैं। जबकि अमेरिका ने बदले में भारत से इम्पोर्ट बढ़ाने का कोई वादा नहीं किया है। अमेरिका ने बार-बार यह भी कहा है कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करने पर राजी हो गया है, लेकिन मोदी सरकार ने इस वादे के लिए कोई साफ वजह नहीं बताई है।
प्रधानमंत्री मोदी ने 25-26 फरवरी 2026 को इज़रायल का दौरा किया था। उस समय जब पूरी दुनिया जानती थी कि ईरान पर US-इजराइली मिलिट्री हमला होने वाला है, जिसका मकसद वहां की सरकार बदलना है। यह हमला पीएम मोदी के इज़रायल से जाने के ठीक दो दिन बाद शुरू हुआ। वहां नेसेट में उनका भाषण नैतिक कायरता का शर्मनाक प्रदर्शन था। ईरान पर थोपे गए इस युद्ध पर मोदी सरकार का जवाब भारत के मूल्यों, सिद्धांतों, चिंताओं और हितों के साथ धोखा है।
पीएम नरेंद्र मोदी ने 19 जून 2020 को सबके सामने चीन को क्लीन चिट दे दी थी। यह चौंकाने वाला बयान ऐसे समय में आया जब लद्दाख बॉर्डर पर हमारे 20 बहादुर सैनिक शहीद हो गए थे। इस क्लीन चिट ने हमारी बातचीत की स्थिति को बहुत कमज़ोर कर दिया है और अब हमें चीन की शर्तों पर रिश्ते नॉर्मल करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।