डोनाल्ड ट्रंप, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Us Iran Ceasefire Extension 14 Days: मध्य पूर्व में जारी सात हफ्तों के भीषण संघर्ष के बीच शांति की एक धुंधली किरण दिखाई दी है। खबरों के अनुसार, अमेरिका और ईरान मंगलवार को समाप्त होने वाले युद्धविराम (Ceasefire) को अगले दो सप्ताह के लिए बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। इस संभावित विस्तार का मुख्य उद्देश्य एक स्थायी शांति समझौते पर बातचीत करने के लिए अतिरिक्त समय जुटाना है।
सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थ उन तकनीकी वार्ताओं को आयोजित करने की कोशिश कर रहे हैं जिनसे सबसे विवादास्पद मुद्दों को सुलझाया जा सके। इन मुद्दों में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना और ईरान के परमाणु संवर्धन (Nuclear Enrichment) का स्तर शामिल है। यदि ये तकनीकी वार्ताएं सफल रहती हैं तो यह दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच अगले दौर की उच्च-स्तरीय बातचीत का मार्ग प्रशस्त कर सकती हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संघर्ष के जल्द समाप्त होने की संभावना जताई है। उन्होंने फॉक्स बिजनेस को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि करीब सात हफ्तों से जारी यह युद्ध ‘खत्म होने के करीब’ है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि अभी तक सीजफायर विस्तार पर औपचारिक सहमति नहीं बनी है और बातचीत निजी स्तर पर जारी है।
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए बमबारी के साथ शुरू हुए इस युद्ध ने भारी तबाही मचाई है। ईरान के सैन्य और बुनियादी ढांचे को बड़ा नुकसान पहुंचा है वहीं ईरान के जवाबी हमलों ने पूरे मध्य पूर्व में उथल-पुथल मचा दी है। विशेष रूप से होर्मुज जलमार्ग के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा की कीमतों में भारी उछाल आया है जिसने राष्ट्रपति ट्रंप के लिए राजनीतिक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
सीजफायर के बावजूद मुख्य विवाद अभी भी अनसुलझे हैं। ईरान का कहना है कि नागरिक उद्देश्यों के लिए यूरेनियम संवर्धन उसका अधिकार है जिसे रद्द नहीं किया जा सकता, हालांकि इसके स्तर पर बातचीत की जा सकती है।
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दूसरी ओर, ट्रंप प्रशासन और इजरायल का रुख सख्त है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए उसका संवर्धित यूरेनियम का भंडार पूरी तरह नष्ट या वापस किया जाना चाहिए। हाल ही में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ के बीच हुई मुलाकात भी बिना किसी अंतिम समझौते के समाप्त हो गई थी।