‘सिर्फ दिखावे के लिए जेल भेजते…’, SC की सख्त टिप्पणी ने खोली जांच एजेंसियों की पोल
Supreme Cour ने आज एक सुनवाई के दौरान कहा कि बिना किसी एविडेंस व तकनीकी जांच के सिर्फ गवाहों और कबूलनामे के आधार पर मामलों को साबित करना मुश्किल है। इससे सालों का ट्रायल भी बेअसर रहेगा।
- Written By: सौरभ शर्मा
सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया (फोटो- सोशल मीडिया)
SC on Chhattisgarh coal scam case: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अहम सुनवाई में देश की आपराधिक न्याय प्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि कई बार आरोपियों को सिर्फ यह दिखाने के लिए जेल में रखा जाता है कि कानून अपना काम कर रहा है। कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य सरकारें अब भी 19वीं सदी की जांच प्रक्रिया पर निर्भर हैं, जहां गवाहों की सुरक्षा और वैज्ञानिक जांच को प्राथमिकता नहीं दी जाती। सिर्फ कबूलनामे के जरिए ही सारा कुछ चल रहा होता है। कोर्ट की इस टिप्पणी से पूरे सिस्टम पर बहस छिड़ गई है।
यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने कारोबारी सूर्यकांत तिवारी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान दी। तिवारी पर छत्तीसगढ़ कोयला लेवी और DMF घोटाले में शामिल होने के आरोप हैं। कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि देश की जेलें अब अपराधियों के लिए सबसे सुरक्षित जगह बनती जा रही हैं, जहां से वे अपराध को अंजाम देते रहते हैं और जांच एजेंसियां उन्हें रोकने में नाकाम हैं।
क्या जेल भेजना सिर्फ दिखावा बन गया है?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक कहा कि सिर्फ आरोप लगाकर किसी को जेल में डाल देना कानून की सफलता नहीं मानी जा सकती। कोर्ट ने कहा, “हम केवल लोगों को जेल भेजते हैं और ये सोचते हैं कि इससे लगेगा कि आपराधिक कानून प्रभावी है। लेकिन असल में गवाहों की सुरक्षा और वैज्ञानिक जांच पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।” कोर्ट ने राज्य सरकारों को फटकारते हुए कहा कि उनके पास फॉरेंसिक अकाउंटेंट और विशेषज्ञ जांचकर्ता तक नहीं हैं।
सम्बंधित ख़बरें
अकोला मर्डर केस: घरेलू विवाद में खूनी खेल, रिश्तेदार ने युवक पर किया जानलेवा हमला; आरोपी गिरफ्तार
कल्याण-डोंबिवली में नाबालिग बच्चियों से दुष्कर्म के 3 मामले, सभी आरोपी गिरफ्तार
TET अनिवार्यता पर सुप्रीम कोर्ट में फैसला लंबित, MP के शिक्षक संगठनों ने पुराने टीचर्स के लिए मांगी राहत
गड़चिरोली में नकली नोट रैकेट का पर्दाफाश, बैंक ऑफ महाराष्ट्र में खुला फर्जी नोटों का खेल, अब जांच तेज
यह भी पढ़ें: सत्यपाल मलिक के निधन पर विपक्ष में शोक, BJP नेताओं ने साधी चुप्पी; PM मोदी भी मौन
अदालत ने दी जांच एजेंसियों को चेतावनी
राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने दावा किया कि तिवारी ने जेल में रहते सह-आरोपी को धमकी दी है। वहीं तिवारी के वकील मुकुल रोहतगी ने अंतरिम जमानत की मांग की। इस पर अदालत ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब केस में करीब 300 गवाह होंगे, तो ट्रायल कब पूरा होगा? जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि राज्य सरकारें विशेष अदालतें नहीं बना पा रहीं, क्योंकि उनके पास संसाधनों की कमी है। ऐसे में न्याय मिलने की प्रक्रिया तो लटक ही जाएगी। सुप्रीम कोर्ट की यह सख्त टिप्पणी न केवल न्यायिक प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता पर रोशनी डालती है, बल्कि उन हजारों आरोपियों की स्थिति को भी उजागर करती है, जिन्हें बिना पुख्ता सबूत जेलों में डाल दिया जाता है। यह मामला आने वाले समय में जांच और अभियोजन के तरीके बदलने के लिए एक नजीर बन सकता है।
