तिरुपति लड्डू प्रसादम विवाद में सदगुरू की एंट्री, बोले- अब वक्त आ गया है कि हिंदू मंदिरों…!
ईशा फाउंडेशन के संस्थापक और प्रमुख सद्गुरु भी अब लड्डू प्रसादम मुद्दे में कूद पड़े हैं। इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा है कि हिंदू मंदिरों का संचालन सरकारी प्रशासन द्वारा नहीं किया जाना चाहिए।
- Written By: रीना पंवार
(फोटो सोर्स सोशल मीडिया)
नई दिल्लीः कोयंबटूर में स्थित ईशा फाउंडेशन के संस्थापक और प्रमुख सद्गुरु ने लड्डू प्रसादम मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि मंदिर के प्रसाद में भक्तों द्वारा गाय की चर्बी का सेवन करना अत्यंत घृणित है। सद्गुरु ने कहा कि यही कारण है कि मंदिरों का संचालन भक्तों द्वारा किया जाना चाहिए न कि सरकारी प्रशासन द्वारा। आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू की सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के ऊपर यह संगीन आरोप लगाया था कि तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) में प्रसाद के रूप में मिलने वाले लड्डू में जिस घी का इस्तेमाल किया गया, वह मिलावटी था। इसमें जानवरों की चर्बी और फिश ऑयल भी मिलाया जा रहा था।
हालांकि, लड्डू प्रसादम में जानवरों की चर्बी के इस्तेमाल पर हुए जोरदार विवाद के बाद मंदिर प्रशासन ने इस पवित्र प्रसाद की पवित्रता बहाल कर दी है। इस बाबत श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर प्रबंधन तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम बोर्ड (TTD)ने बीते शुक्रवार सोशल मीडिया पर पोस्ट में कहा कि श्रीवारी लड्डू की पवित्रता अब बेदाग है। टीटीडी सभी भक्तों की संतुष्टि के लिए लड्डू प्रसादम की पवित्रता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
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श्रद्धालुओं को करना चाहिए हिंदू मंदिरों का संचालन
इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ईशा फाउंडेशन के संस्थापक ने आगे कहा कि जहां भक्ति नहीं होगी वहां पवित्रता भी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि हिंदू मंदिरों का संचालन श्रद्धालु हिंदुओं द्वारा किया जाए, न कि सरकारी प्रशासन द्वारा। आपको बता दें कि तिरुपति दर्शन करने जाने वाले श्रद्धालुओं को यहां का प्रसिद्ध लड्डू प्रसाद में दिया जाता है। यहां रोज करीब 3 लाख लड्डू बनाए जाते हैं। लड्डू को चने के बेसन, मक्खन, चीनी, काजू, किशमिश और इलायची से बनाया जाता है। इसकी रेसिपी करीब 300 साल पुरानी बताई जाती है। मंदिर प्रशासन हर साल इस प्रसाद से लगभग 500 करोड़ की कमाई करता है।
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