ग्रहण और तुलसी के पत्ते (सौ.सोशल मीडिया)
Tulsi Leaves: साल का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को लगने के बाद अब पूरी दुनिया में 3 मार्च 2026 को पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। जानकारों के अनुसार, यह ग्रहण भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में दिखेगा। वहीं भारतीय घरों में एक पुरानी परंपरा बड़े जोर-शोर से निभाई जाती है वह है खाने-पीने की चीजों में तुलसी के पत्ते डालना।
बचपन से ही हम अपनी दादी-नानी को यह कहते सुनते आए हैं कि ग्रहण के दौरान भोजन को अशुद्ध होने से बचाना है तो उसमें तुलसी डाल दो।
ऐसी मान्यता है कि ग्रहण के दौरान सूर्य या चंद्रमा से आने वाली किरणों में रुकावट आती है। इसकी वजह से पृथ्वी के वातावरण में हानिकारक पराबैंगनी किरणों का प्रभाव बढ़ जाता है। तुलसी में पाए जाने वाले विशिष्ट पारा (Mercury) और एंटी-बैक्टीरियल गुण भोजन को दूषित होने से बचाने में मदद करते हैं। ऐसे में खाने और पीने की चीजों में तुलसी के पत्ते डालने से उसकी शुद्धता बनी रहती है।
विज्ञान भी ग्रहण के दौरान कुछ सावधानियाँ अपनाने की बात करता है। आपके द्वारा बताया गया विवरण वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सही है:
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से चंद्र ग्रहण के समय वायुमंडल में पराबैंगनी (UV) किरणों का स्तर असामान्य रूप से बढ़ता नहीं है, लेकिन पारंपरिक मान्यता के अनुसार इसे संवेदनशील माना जाता है।
तुलसी के पत्तों में एंटी-बैक्टीरियल और एंटीऑक्सिडेंट गुण होते हैं। इसलिए खाने या पानी में तुलसी डालने से साफ-सफाई और सूक्ष्मजीवों से सुरक्षा बनी रहती है।
ग्रहण के समय भोजन की आणविक संरचना बिगड़ने लगती है। तुलसी का पत्ता एक ‘स्टेबलाइजर’ की तरह काम करता है और खाने के पोषक तत्वों को नष्ट होने से बचाता है।
शास्त्रों में तुलसी को शुद्ध माना गया है। इसकी गंध और प्रभाव से वातावरण की नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) खत्म होती है और भोजन सात्विक बना रहता है।
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ग्रहण के दौरान पारंपरिक तौर पर भोजन को ढक कर रखना और तुलसी डालना, संक्रमण और दूषित होने की संभावना कम करने के उपाय हैं।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह भोजन और पानी को सुरक्षित रखने का एक सरल उपाय है, जबकि ज्योतिष में इसे शुभ माना जाता है।