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Delhi Liquor Scam Case: CBI ने दिल्ली शराब पॉलिसी केस में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और के. कविता समेत दूसरे लोगों को बरी किए जाने के फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है। दिल्ली की एक स्पेशल कोर्ट ने शुक्रवार को अरविंद केजरीवाल के साथ मनीष सिसोदिया और बाकी सभी आरोपियों को कथित शराब पॉलिसी स्कैम में बरी कर दिया।
राउज एवेन्यू कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ CBI की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से मना कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के व्यवहार की इजाज़त देना संवैधानिक सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन होगा। किसी आरोपी को माफ करना और उसे गवाह बनाना और उसके बयानों का इस्तेमाल जांच में कमियों को छिपाने या दूसरों को फंसाने के लिए करना गलत है।
अदालत के फैसले की बाद CBI के एक प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कि एजेंसी ने ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ तुरंत हाई कोर्ट में अपील करने का फैसला किया है क्योंकि जांच के कई पहलुओं को या तो नज़रअंदाज़ कर दिया गया है या उन पर ठीक से विचार नहीं किया गया है। CBI इस फैसले को तुरंत दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती देगी।
इस मामले में बरी किए गए दूसरे आरोपियों में कुलदीप सिंह, नरेंद्र सिंह, विजय नायर, अभिषेक बोइनपल्ली, अरुण रामचंद्र पिल्लई, मुथा गौतम, समीर महेंद्रू, अमनदीप सिंह धाल, अर्जुन पांडे, बुचिबाबू गोरंटला, राकेश जोशी, दामोदर प्रसाद शर्मा, प्रिंस कुमार, चनप्रीत सिंह रायत, अरविंद कुमार सिंह, दुर्गेश पाठक, अमित अरोड़ा, विनोद चौहान, आशीष माथुर और पी. सरथ चंद्र रेड्डी शामिल हैं।
स्पेशल जज जितेंद्र सिंह ने CBI की जांच की कमियों पर नाराज़गी जताई और कहा कि केजरीवाल के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है। सिसोदिया के खिलाफ भी कोई पहली नज़र में केस नहीं बनता है। CBI पिछली AAP सरकार की एक्साइज पॉलिसी से जुड़े करप्शन केस की जांच कर रही है, जिसे अब रद्द कर दिया गया है।
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स्पेशल जज जितेंद्र सिंह ने सख्त टिप्पणी की कि डिटेल्ड चार्जशीट में कई कमियां थीं, जिनकी सबूतों या गवाहों से पुष्टि नहीं हुई। चार्जशीट में अंदरूनी विरोधाभास कॉन्सपिरेसी थ्योरी को कमजोर करते हैं। केजरीवाल के खिलाफ आरोप बिना किसी सबूत के टिक नहीं सकते।
कोर्ट ने साफ कहा कि अरविंद केजरीवाल को बिना किसी ठोस सबूत के फंसाया गया है। जज ने कहा कि यह कानून के खिलाफ है। सिसोदिया के बारे में जज ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे पता चले कि वह इसमें शामिल है, और न ही उससे कोई रिकवरी हुई है।
कोर्ट ने कहा कि एक्साइज पॉलिसी में कोई बड़ी साजिश या गलत इरादा नहीं दिखता। CBI का केस जांच में सही साबित नहीं होता, क्योंकि यह सिर्फ अंदाजे पर आधारित है। कोर्ट ने सिर्फ गवाहों के बयानों के आधार पर केस बनाने के लिए CBI की भी आलोचना की। CBI ने अंदाजे के आधार पर साजिश की कहानी बनाने की कोशिश की है।