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राजीव दीक्षित जिन्होंने पढ़ाई के दौरान शुरू किया ‘आजादी बचाओ आंदोलन’, मौत को लेकर आखिर क्यों उठते हैं सवाल

भारत स्वाभिमान एवं स्वदेशी मंच के राष्ट्रीय संयोजक राजीव दीक्षित की 30 नवंबर को जयंती व पुण्यतिथि मनाई जा रही है। वह आयुर्वेद और योग के अच्छे जानकार थे।उन्होंने देश में बनी वस्तुओं को बढ़ावा देने के लिए कार्य किए।

  • By प्रीति शर्मा
Updated On: Nov 30, 2024 | 02:56 AM

राजीव दीक्षित

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Rajiv Dixit Birth Anniversary: भारत स्वाभिमान एवं स्वदेशी मंच के राष्ट्रीय संयोजक राजीव दीक्षित की आज यानी 30 नवंबर को जयंती व पुण्यतिथि मनाई जा रही है। वह आयुर्वेद और योग के अच्छे जानकार थे। उन्होंने देश में बनी वस्तुओं को बढ़ावा देने के लिए कई कार्य किए। इसके अलावा वह अपनी सभाओं में लोगों को एलोपैथी छोड़कर आयुर्वेद का अपनाने की सलाह देते थे। वह उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ के रहने वाले थे।

राजीव ने प्रयागराज के जेके इंस्टीट्यूट से बीटेक की शिक्षा हासिल करने के दौरान आजादी बचाओ आंदोलन में भाग लिया। उस समय इसके संस्थापक बनवारीलाल शर्मा थे जो कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय में गणित विभाग के शिक्षक हुआ करते थे। राजीव संस्था में प्रवक्ता के तौर पर कार्य करते थे। इसके अलावा संस्था में अभय प्रताप, संत समीर, केशर, राम धीरज, मनोज त्यागी व योगेश कुमार मिश्रा शोधकर्ता के रूप में अपने अपने विषयों पर कार्य करते थे। जो नई आजादी उद्घोष नाम की मासिक पत्रिका में प्रकाशित हुआ करती थी। राजीव बचन से भी देश की समस्याओं के बारे में जानने में रुचि रखते थे।

उन्होंने उच्च माध्यमिक शिक्षा पूरी करने के बाद इलाहाबाद में 1984 में अपनी बीटेक की पढ़ाई की। उन्होंने इलाहाबाद में बीटेक और फिल आईआईटी कानपुर से एमटेक की पढ़ाई की। राजीव दीक्षित अपने वीडियो में यह दावा करते हैं कि उन्होंने फ्रांस से पीएचडी की थी और सीएसआईआर में एंटी ग्रैविटी पर रिसर्च कार्य भी किया था। उनके समर्थकों का मानना है कि अगर वह आज जिंदा होते तो भारत में स्वदेश और आयुर्वेद का नाम सबसे ऊपर होता है। लेकिन 43 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से उनकी मृत्यु हो गई थी। लेकिन इसे लेकर भी कई तरह के विवाद जुड़े हैं। कुछ लोगों को मानना है कि यह हत्या था।

मौत पर उठते हैं सवाल

राजीव दीक्षित का जन्म 30 नवंबर 1967 में हुआ था और 30 नवंबर 2010 को उनकी मृत्यु हो गई थी। उन्होंने साल 2009 में भारत स्वाभिमान आंदोलन का गठन किया था। जिसके जरिए उन्होंने देश के लोगों में स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को लेकर लोगों को जागरूक किया। इसके बाद उन्होंने बाबा रामदेव के साथ मिलकर विदेशी कंपनियों के खिलाफ अभियान को तेज किया। इसके बाद वह मल्टीनेशनल कंपनियों के निशाने पर आए थे। उनकी मौत को लेकर भी कई तरह के सवाल उठाए जाते हैं।

साल 1984 में भोपाल गैस त्रासदी का बाद उनका नाम सुर्खियों में आने लाग। उन्होंने यूनियन कार्बाइड कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन भी किए। उनका दावा था कि यूनियन कार्बाइड घटना अमेरिका की साजिश थी। इसे भारतीयों पर एक्सपेरिमेंट के तौर पर किया गया था। उन्होंने इसके बाद विदेशी कंपनियों के खिलाफ मुहिम शुरू की। उन्होंने भारतीय शिक्षा, टैक्स सिस्टम, मॉर्डन मेडिसिन, अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की आलोचना शुरु कर दी थी।

वह नवंबर साल 2010 में छत्तीसगढ़ दौरे पर थे। जहां अलग-अलग व्याख्यान देने के बाद वह भिलाई पहुंचे। यहां पर उनकी तबीयत खराब हो गई। वहां से दुर्ग जाने के दौरान रास्ते में उनकी हालत बहुत ज्यादा खराब होने लगी। जिसके बाद उन्हें दुर्ग में रोका गया और भिलाई के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद उन्हें अपोलो बीएसआर अस्पताल शिफ्ट किया गया और वहां पर उनकी मृत्यु हो गई। राजीव के समर्थकों का कहना था कि मौत के दौरान उनका शव नीला पड़ गया था। जिसे देख लोगों को लगा की उनकी हत्या की गई है। राजीव के परिवार वालों ने पोस्टमार्टम के लिए इंकार कर दिया और उनका शव हरिद्वार में अंतिम संस्कार के लिए लाया गया।

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Rajiv dixit started save freedom movement during his studies why questions are raised about his death

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Published On: Nov 30, 2024 | 02:56 AM

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  • Uttar Pradesh

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