पेट्रोल-डीजल की चौथी बढ़ोतरी से आगबबूला हुई देश की जनता, ट्रांसपोर्ट उद्योग संकट में
Petrol Diesel Price Hike: पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार चौथी बढ़ोतरी के बाद महंगाई और ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने लगी है। ट्रांसपोर्ट उद्योग ने सरकार से टैक्स घटाने की मांग की है।
- Written By: अपूर्वा नायक
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आज फिर बढ़ोतरी (सोर्स-फाइल फोटो)
Petrol Diesel Price Hike News: पेट्रोल-डीजल की कीमतों में की गई चौथी दर वृद्धि को लेकर जनता में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। विपक्ष ने जहां केंद्र सरकार और राज्य सरकार की आलोचना की है तो वहीं ट्रांसपोर्टरों ने भी कड़ी नाराजगी जताई है। इधर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि इस वैश्विक संकट में केंद्र सरकार सही कदम उठा रही है, इसके अच्छे नतीजे जल्द ही दिखेंगे।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में ज्यादातर समय भारत का महंगाई इंडेक्स सबसे कम था। अभी पूरी दुनिया में आर्थिक और महंगाई का संकट है, जिसका असर भारत पर भी पड़ रहा है।
हालांकि पीएम नरेंद्र मोदी लगातार सही कदम उठा रहे हैं। दुनिया के कई देशों में फ्यूल इमरजेंसी है और वहां लॉकडाउन का समय आ गया है। ऐसे हालात में भी हम सप्लाई को ठीक रखने की कोशिश कर रहे हैं। भविष्य में फ्यूल न मिलने के डर से मांग अचानक 20 प्रतिशत बढ़ गई है। उन्होंने अपील की है कि फ्यूल की जमाखोरी न की जाए।
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सरकार बनाए पारदर्शी नीति
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के सलाहकार बल मलकीत सिंह ने कहा कि फ्रेट संरचना व एस्केलेशन व्यवस्था की तत्काल समीक्षा की जाए। लागत आधारित वैज्ञानिक फ्रेट मॉडल लागू किया जाना चाहिए, सरकार पारदर्शी नीति बनाए। निर्वाध ईंधन उपलब्ध कराया जाए। परिवहन केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। बहुत देर होने से पहले सुधारात्मक कदम उठाने आवश्यक हैं। यदि परिवहन कमजोर होगा तो अर्थव्यवस्था भी कमजोर होगी।
चिंता में परिवहन उद्योग
- पूरे परिवहन व लॉजिस्टिक्स उद्योग में गंभीर चिंता की स्थिति उत्पन्न हो गई है। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने नाराजगी जताई है कि परिवहन उद्योग को हर कुछ दिनों में धीमा जहर’ दिया जा रहा है।
- डीजल अकेले ट्रक संचालन लागत का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा होता है। साथ ही टायर, बीमा, टोल, मेंटेनेंस, वित्तीय लागत और अनुपालन खर्चों में निरंतर वृद्धि ने आर्थिक व्यवहार्यता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
- अब यह राष्ट्रीय सप्लाई चैन का मुद्दा बनता जा रहा है। विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में वाहनों के निर्धक्क्रय रहने की जानकारी मिल रही है। प्रति वाहन प्रतिदिन लगभग 3500 रुपये तक का नुकसान होने की स्थिति सामने आ रही है।
- सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ रहा है, डिलीवरी में देरी हो रही है। उत्पादन, आयात-निर्यात और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। राज्य के कई पेट्रोल पंपों पर फ्यूल के लिए कतारें लगी हैं, कई मालवाहक वाहन सड़कों पर खड़े हो गए हैं।
अभी और बढ़ेंगे फ्यूल के दाम
सरकारी तेल कंपनियों ने पिछले 10-11 दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में चौथी बार बढ़ोतरी की है। पेट्रोल 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा कर दिया है। लगातार चौथे इजाफे से तेल की कुल कीमत में 7 से 8 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हो चुकी है, जिससे माल भाड़ा बढ़ने से रोजमर्रा के सामान भी महंगे होने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि तेल कंपनियों को अभी भी भारी घाटा हो रहा है, जिसकी भरपाई के लिए कीमतों में और बढ़ोतरी होने की आशंका बनी हुई है। लगातार बढ़ती महंगाई के बीच व्यापारिक संगठनों, ट्रांसपोर्टरों ने सरकार से ईंधन पर टैक्स घटाकर उसे सस्ता करने की मांग की है।
बढ़ी लोन डिफाल्ट की आशंका
ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि आगामी दिनों में ईएमआई व वित्तीय दायित्वों में बड़े पैमाने पर डिफॉल्ट की आशंका बढ़ रही है। ECLGS 5।0 की घोषणा हो चुकी है। लेकिन अभी तक बैंकों को इसके क्रियान्वयन हेतु स्पष्ट दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। करीब 25 करोड़ लोग प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से परिवहन उद्योग से अपनी आजीविका चलाते हैं। यदि यह स्थिति लंबी चली, तो इसका व्यापक आर्थिक प्रभाव देखने को मिल सकता है।
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जनता की जेब पर डाका डाल रही सरकार- सपकाल
कांग्रेस पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने आरोप लगाया है कि पहले ही महंगाई से परेशान आम जनता की जेब पर सरकार डाका डाल रही है। अगर महंगाई कंट्रोल नहीं हो सकती तो पीएम मोदी को इस्तीफा दे देना चाहिए। मोदी सरकार घटिया क्वालिटी का पेट्रोल इथेनॉल के साथ मिलाकर 110 रुपये प्रति लीटर में बेच रही है।
पिछले 12 वर्षों में मोदी सरकार ने पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर टैक्स और एक्साइज ड्यूटी के जरिए 43 लाख करोड़ रुपये की आमदनी कमाई है। पिछले चार-पांच दिनों में भारत पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने कुछ ही घंटों में मार्केट से 12,400 करोड़ कमाए हैं।
