
प्लेटफॉर्म पर ड्रेस में खड़े रेल अफसर। इमेज-एआई, प्रतीकात्मक
Indian Railways News: भारतीय रेलवे अब अंग्रेजों के जमाने की पहचान से पूरी तरह मुक्त होने और खुद को समय के साथ बदलने की राह पर है। इसी क्रम में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेल अफसरों के लिए दशकों पुराने काले कोट के अनिवार्य ड्रेस कोड को समाप्त करने का ऐलान किया है।
रेल मंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि ब्रिटिश काल से चले आ रहे बंद गले के काले सूट और कोट को अब औपचारिक पोशाक के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। यह फैसला केवल ड्रेस कोड का बदलाव नहीं, बल्कि रेलवे की कार्य संस्कृति से औपनिवेशिक मानसिकता को जड़ से मिटाने की बड़ी पहल मानी जा रही है।
अब तक रेलवे में निरीक्षण, परेड और विशेष सरकारी आयोजनों के दौरान अफसरों के लिए काला कोट पहनना अनिवार्य था। यह पहनावा अंग्रेजों ने अपने शासन काल के दौरान रसूख और अनुशासन के प्रतीक के रूप में शुरू किया था। रेल मंत्री ने 70वें अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार समारोह के दौरान कहा कि चाहे वह काम करने का तरीका हो या पहनावा, हमें अंग्रेजों की आहट से दूर होना होगा। हमें भारतीय समाधानों पर भरोसा करना होगा।
विकसित भारत की विकसित रेलवे के लिए हमारे संकल्प
✅ 2026 में 52 reforms
✅ Technology, innovation और AI का उपयोग
✅ Maintenance practices का एक नया स्तर
✅ Safety पर focus
✅ Training के नए parameters
✅ No colonial mindset 📍Ati Vishisht Rail Seva Puraskar 2025,… pic.twitter.com/Q9yOE66y5j — Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) January 9, 2026
काले कोट से निजात दिलाने के साथ ही रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस साल के लिए बड़ा रोडमैप पेश किया है। उन्होंने 52 हफ्ते-52 सुधार का लक्ष्य रखा है। इसके तहत हर हफ्ते एक नया सुधार किया जाएगा। सेवा, उत्पादन, निर्माण और सुरक्षा जैसे हर विभाग में हर सप्ताह एक नया सुधार लागू होगा। रेलवे अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक को खुले मन से अपनाएगा, जिससे पिछले 100 वर्षों की कमियों को दूर किया जा सके। इसके साथ ही रेल मंत्री ने इनोवेशन अवॉर्ड को लागू करने की घोषणा कर दी है। रेलवे के विकास में योगदान देने वाली टीमों को इनोवेशन अवॉर्ड दिया जाएगा। इसमें सर्वश्रेष्ठ टीम को एक लाख रुपये तक का नकद पुरस्कार मिलेगा।






