सत्ता की रक्षा में लोकतंत्र की बलि? SIR सुधार नहीं, थोपा गया जुल्म, 16 मौतों पर राहुल का बड़ा हमला
ECI Controversy: देश में चल रहे SIR को लेकर Rahul Gandhi ने ECI पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया है कि इसके नाम पर देश भर में एक तरह का जुल्म थोपा जा रहा है।
- Written By: सौरभ शर्मा
राहुल गांधी का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला (फोटो- सोशल मीडिया)
Rahul Gandhi Attacks on ECI SIR Process: देश में चल रहे मतदाता सूची के पुनरीक्षण काम को लेकर राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर अब तक का सबसे तीखा और भावनात्मक हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया है कि स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR के नाम पर देश भर में एक तरह का जुल्म थोपा जा रहा है। नतीजा यह हुआ है कि महज तीन हफ्तों के भीतर काम के बोझ तले दबे 16 बूथ लेवल अफसरों की जान चली गई है। राहुल गांधी ने इसे महज प्रशासनिक नाकामी नहीं, बल्कि सत्ता की रक्षा के लिए लोकतंत्र की बलि करार दिया है।
राहुल गांधी ने कहा कि भारत दुनिया के लिए अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर बनाता है, लेकिन चुनाव आयोग आज भी कागजों का जंगल खड़ा करने पर अड़ा है। आयोग ने जानबूझकर ऐसा सिस्टम बनाया है जिसमें नागरिकों को अपना नाम खोजने के लिए 22 साल पुरानी मतदाता सूची के हजारों स्कैन पन्ने पलटने पड़ रहे हैं। इसका मकसद साफ है कि सही मतदाता थककर हार मान ले और वोट चोरी बिना रोक-टोक जारी रहे। उन्होंने कहा कि अगर नीयत साफ होती तो लिस्ट डिजिटल और सर्चेबल होती, लेकिन यहां बीएलओ की मौतों को सिर्फ ‘कॉलैटरल डैमेज’ मानकर अनदेखा किया जा रहा है।
SIR के नाम पर देश भर में अफ़रा-तफ़री मचा रखी है – नतीजा? तीन हफ्तों में 16 BLO की जान चली गई। हार्ट अटैक, तनाव, आत्महत्या – SIR कोई सुधार नहीं, थोपा गया ज़ुल्म है। ECI ने ऐसा सिस्टम बनाया है जिसमें नागरिकों को खुद को तलाशने के लिए 22 साल पुरानी मतदाता सूची के हज़ारों स्कैन पन्ने… pic.twitter.com/oHdabs0kHe — Rahul Gandhi (@RahulGandhi) November 23, 2025
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19 दिनों में 16 जिंदगियां खत्म
आंकड़े बेहद डराने वाले हैं। एसआईआर प्रक्रिया 4 नवंबर को शुरू हुई थी और तब से अब तक 19 दिनों में 6 राज्यों में 16 बीएलओ की मौत हो चुकी है। मध्य प्रदेश और गुजरात में 4-4, पश्चिम बंगाल में 3, राजस्थान में 2, और तमिलनाडु-केरल में 1-1 बीएलओ ने जान गंवाई है। मध्य प्रदेश के रायसेन में बीएलओ रमाकांत पांडे की मौत हो गई, परिजनों का कहना है कि वे चार रातों से सोए नहीं थे। वहीं रायसेन के ही नारायण सोनी निलंबन की चेतावनी और टारगेट के डर से छह दिनों से लापता हैं। भोपाल में काम के दौरान कीर्ति कौशल और मोहम्मद लईक को हार्ट अटैक आ गया। यह दबाव जानलेवा साबित हो रहा है।
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दहशत और फॉर्म का गणित
हालात इतने बदतर हैं कि पश्चिम बंगाल के नदिया में बीएलओ रिंकू ने सुसाइड कर लिया, तो गुजरात के सौराष्ट्र में अरविंद वाढेर ने चिट्ठी लिखकर जान दे दी कि उनसे यह काम नहीं हो सकता। राजस्थान में जयपुर के मुकेश जांगिड़ ने ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। आंकड़ों की बात करें तो राजस्थान में सबसे ज्यादा 60.54 फीसदी फॉर्म डिजिटल हुए हैं, जबकि केरल में यह आंकड़ा महज 10.58 फीसदी है। राहुल गांधी का कहना है कि 30 दिन की हड़बड़ी में किया जा रहा यह काम पारदर्शिता नहीं, बल्कि एक सोची-समझी चाल है जिससे लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है।
