राहुल गांधी (Image- Social Media)
Rahul Gandhi News: लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद राहुल गांधी शनिवार को महाराष्ट्र के भिवंडी की अदालत में पेश हुए। यह पेशी 2014 में दर्ज एक मानहानि मामले से जुड़ी है, जिसमें उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर कथित बयान के लिए दोषी ठहराया गया था।
राहुल गांधी दिल्ली से मुंबई पहुंचे और फिर भिवंडी की एडिशनल सेशंस कोर्ट में गए। उनके वकील नारायण अय्यर ने बताया कि पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल उनके जमानत गारंटर थे, लेकिन उनके निधन के बाद कोर्ट ने नए गारंटर पेश करने और ताजा बॉन्ड साइन करने का निर्देश दिया था। शनिवार की सुनवाई मुख्य रूप से इसी औपचारिक प्रक्रिया पर केंद्रित रही। राहुल गांधी ने नए गारंटर के साथ बॉन्ड पर हस्ताक्षर किए और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कीं।
मामला 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी के एक बयान से जुड़ा है। 6 मार्च 2014 को एक रैली में उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि आरएसएस ने महात्मा गांधी की हत्या में भूमिका निभाई थी। स्थानीय आरएसएस कार्यकर्ता राजेश कुंटे ने इस पर आपत्ति जताते हुए मानहानि का मामला दर्ज कराया था।
मामले की जांच अभी सबूतों के चरण में है। शिकायतकर्ता राजेश कुंटे की क्रॉस-एग्जामिनेशन हो चुकी है, जबकि दूसरे गवाह अशोक सैकर की जांच क्रिमिनल प्रोसीजर कोड की धारा 202 के तहत लंबित है। शनिवार की सुनवाई में कोई क्रॉस-एग्जामिनेशन नहीं हुई, केवल जमानत संबंधी औपचारिकताएं पूरी की गईं।
भिवंडी कोर्ट परिसर में राहुल गांधी की मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। बम स्क्वॉड, डॉग स्क्वॉड और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहे। राहुल गांधी के मुंबई से भिवंडी जाते समय कुछ प्रदर्शनकारियों ने काले झंडे दिखाए, लेकिन कोई बड़ी घटना नहीं हुई। महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि राहुल गांधी कानूनी प्रक्रिया का पालन करने आए हैं और यह उनकी जिम्मेदारी है।
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दिलचस्प बात यह है कि शुक्रवार को ही राहुल गांधी उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में एक अन्य मानहानि मामले में पेश हुए थे। यह मामला केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित टिप्पणियों से जुड़ा था, जिसे 2018 में स्थानीय भाजपा नेता विजय मिश्रा ने दर्ज कराया था। राहुल गांधी ने कोर्ट में अपना बयान दर्ज कराया और इसे “राजनीतिक दुर्भावना” से प्रेरित बताया। सुनवाई महज 20 मिनट चली और अगली तारीख 9 मार्च तय की गई। ये दोनों मामले राहुल गांधी के खिलाफ विभिन्न राज्यों में चल रहे दर्जनों कानूनी मामलों का हिस्सा हैं, जिन्हें कांग्रेस अक्सर राजनीतिक प्रतिशोध बताती है।