Bhagwant Mann Akal Takht (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
Bhagwant Mann: पंजाब की राजनीति और धार्मिक गलियारों में आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण रहा। मुख्यमंत्री भगवंत मान गुरुवार को अमृतसर स्थित श्री अकाल तख्त साहिब के सचिवालय में नंगे पैर पेश हुए। उन्होंने सिख आचार संहिता के उल्लंघन और सोशल मीडिया पर वायरल आपत्तिजनक वीडियो के संबंध में अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज को अपना स्पष्टीकरण सौंपा। लगभग एक घंटे तक चली इस उच्च स्तरीय बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वह पूरी तरह से सिख धर्मगुरुओं के निर्णय के अधीन हैं।
मुख्यमंत्री मान ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने अपनी ओर से स्पष्टीकरण दे दिया है और अब जत्थेदार इसका अध्ययन करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा, “श्री अकाल तख्त साहिब प्रत्येक सिख के लिए सर्वोच्च आध्यात्मिक केंद्र है और मैं जत्थेदार द्वारा सुनाए गए हर फैसले का सम्मान और पालन करूंगा।” मान ने इस संस्था की पवित्रता को सर्वोपरि बताया।
बैठक के बाद जत्थेदार ज्ञानी गड़गज ने पत्रकारों को बताया कि मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया है कि उन्हें सिखों के धार्मिक मामलों पर कुछ विवादास्पद टिप्पणियां नहीं करनी चाहिए थीं। उन्होंने अकाल तख्त के समक्ष यह भरोसा भी दिलाया है कि वह भविष्य में इस तरह के किसी भी बयान देने से परहेज करेंगे। जत्थेदार ने कहा कि मान की व्याख्या पर पांच सिख उच्च पुरोहितों की अगली बैठक में विस्तार से विचार किया जाएगा और उसके बाद ही कोई अंतिम निर्देश जारी किया जाएगा।
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यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो से जुड़ा है, जिसमें दावा किया गया था कि मुख्यमंत्री की हरकतें सिख गुरुओं और जरनैल सिंह भिंडरांवाले की तस्वीरों के प्रति अपमानजनक थीं। जत्थेदार ने पहले कहा था कि मुख्यमंत्री के बयान सत्ता के अहंकार को दर्शाते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चूंकि मुख्यमंत्री एक ‘धर्मत्यागी’ सिख की श्रेणी में नहीं आते, इसलिए उन्हें पारंपरिक सजा के बजाय सिख संगत को निर्देश के रूप में प्रायश्चित दिया जा सकता है।
भगवंत मान पंजाब के इतिहास में अकाल तख्त द्वारा तलब किए जाने वाले तीसरे मुख्यमंत्री बन गए हैं। इससे पहले 1979 में प्रकाश सिंह बादल को सिख-निरंकारी संघर्ष के मामले में और 1986 में सुरजीत सिंह बरनाला को स्वर्ण मंदिर में पुलिस कार्रवाई के आदेश देने के लिए तलब किया गया था। बरनाला को उस समय ‘तनखैया’ (धार्मिक दुराचार का दोषी) घोषित किया गया था, जिसके बाद उन्होंने 1988 में प्रायश्चित किया था। मान ने पहले ही कहा था कि वह एक सच्चे सिख के रूप में पेश होंगे और अपना पूरा दिन इस संस्था को समर्पित करेंगे।