सीएम भगवंत मान। इमेज-सोशल मीडिया
Punjab Singer Security Withdrew Issue : पंजाब की सियासत में इन दिनों सुरक्षा शब्द सिर्फ बचाव का जरिया नहीं, बल्कि राजनीतिक टकराव का सबसे बड़ा हथियार बन गया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार पर विपक्ष अब बदले की राजनीति का आरोप लगा रहा है। ताजा विवाद एक मशहूर पंजाबी गायक और एक प्रमुख सिख प्रचारक की सुरक्षा अचानक हटाए जाने को लेकर शुरू हुआ है।
लगभग चार साल पहले सिद्धू मूसेवाला की हत्या ने पंजाब में सुरक्षा तंत्र पर गहरे सवाल खड़े किए थे। अब एक और नामचीन पंजाबी गायक ने दावा किया है कि सरकार ने उनकी सुरक्षा में तैनात 14 कर्मियों को वापस बुला लिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह कार्रवाई गायक की शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल से शिष्टाचार मुलाकात के ठीक बाद हुई है। लॉरेंस बिश्नोई गैंग की धमकियों और विदेश में अपने घर पर हुई फायरिंग का हवाला देते हुए गायक ने इस फैसले पर चिंता जताई है।
विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने इस मुद्दे पर तीखा हमला करते हुए कहा कि जो भगवंत मान कभी वीआईपी कल्चर खत्म करने की कसमें खाते थे, वे अब विरोधियों को डराने के लिए पुलिस और प्रशासन का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री की तुलना उनके पैतृक गांव के हवाले से सतौज के महाराजा से कर डाली। बाजवा के अनुसार पंजाब को अहंकारी शासन की नहीं, बल्कि कानून के राज की जरूरत है।
CM Mann withdrew security of a prominent singer soon after he met a political leader. This sends a dangerous message that police and administration exist to please one individual. The same @BhagwantMann who promised to end VIP culture now behaves like the “Maharaja of Satauj.”… — Partap Singh Bajwa (@Partap_Sbajwa) February 24, 2026
विवाद केवल गायकों तक सीमित नहीं है। नानकसर संप्रदाय के प्रमुख संत बाबा घाला सिंह की सुरक्षा हटाए जाने से सिख समुदाय में रोष है। अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने इसे सरकार की ओछी मानसिकता बताते हुए तुरंत सुरक्षा बहाल करने की मांग की है। दिलचस्प यह है कि बाबा घाला सिंह ने भी हाल ही में बादल परिवार से मुलाकात की थी।
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पंजाब में विधानसभा चुनावों की उलटी गिनती शुरू होने के बीच सुरक्षा को लेकर शुरू हुई यह रस्साकशी आने वाले दिनों में और तेज होने वाली है। क्या यह वास्तव में प्रशासनिक समीक्षा है या राजनीतिक संदेश? इसका जवाब अब पंजाब की गलियों में ढूंढा जा रहा है।