PM मोदी ने की ‘एक जिला, एक उत्पाद’ की सराहना, बोले- शिल्प परंपरा से बढ़ेगा आर्थिक विकास
PM Modi Vastrakala: पीएम मोदी ने 'एक जिला, एक उत्पाद' की सराहना करते हुए कहा कि पारंपरिक शिल्प नवाचार और वैश्विक साझेदारी से भारत के आर्थिक विकास व कारीगरों की आजीविका को नई मजबूती प्रदान कर रहे हैं।
- Written By: करुणा नंद शाहवाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (सोर्स-सोशल मीडिया)
PM Modi Traditional Indian Crafts India France Partnership: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि भारत की पारंपरिक शिल्प परंपरा नवाचार और वैश्विक साझेदारियों के माध्यम से आर्थिक विकास की महत्वपूर्ण शक्ति बन सकती है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लिखे गए एक लेख को साझा करते हुए ‘एक जिला, एक उत्पाद’ पहल की सराहना की। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पहल स्थानीय शिल्पों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने, स्थायी आजीविका के अवसर बढ़ाने, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
अपने लेख में वित्त मंत्री ने चेन्नई स्थित ‘वस्त्रकला’ का उदाहरण देते हुए बताया कि भारत और फ्रांस के बीच सहयोग ने भारतीय कारीगरों को वैश्विक फैशन उद्योग से जोड़ने का सफल मॉडल प्रस्तुत किया है। उन्होंने हाल ही में गुडापक्कम स्थित वस्त्रकला की कार्यशाला का दौरा करने के अनुभव साझा करते हुए कहा कि कंपनी ने रोजगार गांवों तक पहुंचाने के उद्देश्य से अपनी इकाई शहर से गांव में स्थानांतरित की। उन्होंने यह भी बताया कि सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पारंपरिक कढ़ाई कला ने वर्षों से ग्रामीण परिवारों के लिए आजीविका का महत्वपूर्ण साधन उपलब्ध कराया है।
‘एक जिला, एक उत्पाद’ पहल की सराहना
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से लिखे गए आर्टिकल को साझा किया, जिसमें उन्होंने बताया कि ‘एक जिला, एक उत्पाद’ पहल स्थानीय शिल्पों को बाजार तक पहुंच हासिल करने, स्थायी आजीविका सृजित करने, विरासत को संरक्षित करने और भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने में मदद कर रही है।
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वस्त्रकला बना भारत-फ्रांस सहयोग का उदाहरण
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि चेन्नई स्थित ‘वस्त्रकला’ इस बात का उदाहरण है कि फ्रांस जैसे देशों के साथ सहयोग भारतीय कारीगरों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने में कैसे मदद कर सकता है।
उन्होंने बताया कि हाल ही में पेरिस में आयोजित एक निवेशकों की बैठक के दौरान भारत में फ्रांस के राजदूत ने ‘वस्त्रकला’ का जिक्र किया था। यह भारत-फ्रांस की साझेदारी का एक अनूठा उदाहरण है, जिसने फ्रांस की हाउट कूचर यानी उच्चस्तरीय फैशन कला को भारत की सदियों पुरानी कढ़ाई परंपरा के साथ जोड़ा है।
गांवों तक पहुंचा उच्च मूल्य का रोजगार
भारत लौटने के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण चेन्नई के निकट तिरुवल्लूर जिले के गुडापक्कम स्थित वस्त्रकला की कार्यशाला गई थीं। वित्त मंत्री ने कहा कि कारीगरों की टीम के साथ दोपहर का भोजन करते समय उन्हें पता चला कि वस्त्रकला ने जानबूझकर अपनी पहली चेन्नई स्थित कार्यशाला को गुडापक्कम स्थानांतरित किया, ताकि पीढ़ियों से इन पारंपरिक कौशलों को संजोए हुए गांवों के लोगों तक उच्च मूल्य वाले रोजगार पहुंचाए जा सकें। यह मानो समय का पहिया उल्टा घूम गया हो। आमतौर पर युवा रोजगार के लिए गांवों से शहरों की ओर पलायन करते हैं, लेकिन यहां एक कंपनी ने शहर छोड़कर गांव में बसने का फैसला किया।
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पारंपरिक कढ़ाई कला की अनूठी विरासत
वित्त मंत्री ने बताया कि वस्त्रकला कांचीपुरम-श्रीपेरंबुदूर-तिरुवल्लूर के सूखा-प्रभावित क्षेत्र में स्थित है। उन्होंने कहा, पुराने समय में जब बारिश नहीं होती थी, तो खेती का काम रुक जाता था।
जब हल चलना बंद हो जाता था, तब किसान सुई-धागा उठाकर सूती और रेशमी कपड़ों पर सुंदर कढ़ाई किया करते थे। अपनी रचनात्मकता के बल पर ग्रामीण सूखे की कठिनाइयों का सामना कर लेते थे। यह कला असाधारण धैर्य, बारीकी और अनुशासन की मांग करती है, और ये गुण शुष्क क्षेत्रों के किसानों में भरपूर होते हैं।
