
भारत-पाक बॉर्डर पर सैन्य अभ्यास करते जवान। इमेज-सोशल मीडिया
India-Pakistan Border News: सीमा सुरक्षा बल (BSF) जल्द भारत-पाकिस्तान सीमा और एलओसी पर घुसपैठ रोकने को ऑपरेशन सर्द हवा शुरू करेगा। यह ऑपरेशन जम्मू-कश्मीर और राजस्थान के भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर चलेगा। बीएसएफ के इस ऑपरेशन का उद्देश्य सर्दियों में घने कोहरे का फायदा उठाकर घुसपैठ के प्रयासों को फेल करना है।
अधिकारियों के अनुसार यह अभियान इस महीने उपयुक्त समय पर शुरू किया जाएगा। जो महीने के अंत तक जारी रहेगा। गणतंत्र दिवस से पहले सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। ऑपरेशन सर्द हवा का मकसद घुसपैठ को रोकना है। सर्दियों में घना कोहरा और धुंध घुसपैठ के लिए अच्छा माहौल बनाते हैं। इस दौरान सीमा पर कड़ी निगरानी और गश्ती बढ़ा दी जाती है।
जम्मू में तैनात एक अधिकारी ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया कि ऑपरेशन सर्द हवा के दौरान भारत-पाकिस्तान सीमा पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाते हैं। इसमें निगरानी और गश्त को बढ़ाया जाता है।
कश्मीर फ्रंटियर के एक अधिकारी ने बताया कि एलओसी पर निगरानी और सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए बीएसएफ के पास अब रडार आधारित और सेंसर आधारित उपकरण, आधुनिक गैजेट्स और उन्नत निगरानी उपकरण शामिल किए गए हैं। उन्होंने कहा कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ड्रोन आधारित निगरानी काफी बढ़ाई गई है।
अधिकारी ने बताया कि घुसपैठ की कोशिशों की खुफिया जानकारी मिलने के बाद इस ऑपरेशन के दौरान हवाई निगरानी को मजबूत करने के लिए विशेष ड्रोन कमांडो और ड्रोन वॉरियर्स, साथ ही बीएसएफ की दुर्गा वाहिनी इकाइयों को तैनात किया जाएगा। राजस्थान फ्रंटियर के एक अधिकारी ने बताया कि कमांडरों को कम्युनिकेशन को सुचारू रखने, नियमित अभ्यास करने और किसी उभरते खतरे से निपटने के लिए मजबूत आकस्मिक योजनाएं बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
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बीएसएफ द्वारा भारत-पाकिस्तान सीमा पर चलाया जाने वाला ऑपरेशन सर्द हवा एक वार्षिक शीतकालीन सुरक्षा अभ्यास है। यह जम्मू-कश्मीर और राजस्थान के चुनौतीपूर्ण इलाकों, जम्मू के अहम सुरक्षा चौकियों और थार रेगिस्तान को कवर करता है। इसमें अंतर्राष्ट्रीय सीमा (IB) और नियंत्रण रेखा (LC) के महत्वपूर्ण हिस्से आते हैं। इस ऑपरेशन का उद्देश्य घने कोहरे के दौरान घुसपैठ, तस्करी और अवैध सीमा पार आवाजाही का पता लगाना है। इसके लिए निगरानी बढ़ाई जाती है। अतिरिक्त जवानों को तैनात किया जाता है। थर्मल इमेजिंग सिस्टम आदि तकनीकों का इस्तेमाल होता है। आमतौर पर यह ऑपरेशन जनवरी में गणतंत्र दिवस के आसपास आयोजित किया जाता है। यह गर्मियों में चलाए जाने वाले घुसपैठ रोधी अभियान ऑपरेशन गरम हवा के साथ-साथ चलता है।






