जन्मदिन विशेष: हरियाणा का ऐसा नेता जिसमें दिखती है देवी लाल की छाप, इस जाट नेता को लोग मानते हैं हुड्डा का रिप्लेसमेंट
3 अप्रैल के दिन हरियाणा के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार में एक ऐसे नेता का जन्म हुआ था, जिसकी राजनीतिक महात्वाकांक्षा में सबसे बड़ी बांधा बनकर उसका ही परिवार उभरा, लेकिन पहलवानों की जमीन पर जन्में इस नेता हार नहीं मानी।
- Written By: Saurabh Pal
दुष्यंत चौटाला (फोटो- सोशल मीडिया)
नवभारत डिजिटल डेस्कः 3 अप्रैल के दिन हरियाणा के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार में एक ऐसे नेता का जन्म हुआ था, जिसकी राजनीतिक महात्वाकांक्षा में सबसे बड़ी बांधा बनकर उसका ही परिवार उभरा, लेकिन पहलवानों की जमीं पर जन्में इस नेता हार नहीं मानी। पारिवारिक कलह के चलते अपने दादा पूर्व उप प्रधानमंत्री देवीलाल चौटाला की पार्टी इंडियन नेशनल लोकदल से पिता और छोटे भाई के साथ अलग हो गए। चुनाव से एक साल पहले 2018 में एक नई पार्टी बनाई और 2019 विधानसभा चुनाव में करिश्मा कर दिया। इसके बाद डिप्टी सीएम की कुर्सी पर कब्जा जमाया।
इस हरियाणवी कद काठी के व्यक्ति को हम दुष्यंत चौटाला के नाम से जानते हैं। इनका जन्म फेमस चौटाला परिवार में 1988 में हरियाणा के सिरसा जिले में हुआ था। हरियाणा की राजनीति में दुष्यंत चौटाला एक ऐसा नाम हैं, जिन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। अपने युवा जोश, नई सोच और प्रभावी नेतृत्व क्षमता के बल पर उन्होंने प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया है।
2014 में पहले बने थे हिसार से सांसद
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वे पूर्व उप-प्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल के प्रपौत्र और पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला के पोते हैं। उनके पिता अजय सिंह चौटाला भी एक प्रमुख राजनेता हैं। राजनीति उनके खून में बसी हुई थी, लेकिन उन्होंने अपने दम पर राजनीति में अपनी पहचान बनाई। दुष्यंत चौटाला ने 2014 में पहली बार हिसार लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीतकर देश के सबसे युवा सांसद बने। वे भारतीय राष्ट्रीय लोक दल (इनेलो) के टिकट पर चुने गए थे। संसद में रहते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर आवाज उठाई और किसानों, युवाओं और आम जनता से जुड़े मसलों पर चर्चा की। उनकी सक्रियता और बेबाकी ने उन्हें तेजी से लोकप्रिय बना दिया।
भूपेंद्र हुड्डा की दिखती दुष्यंत में झलक
दुष्यंत चौटाला जाट समुदाय से संबंध रखते हैं। उनमें पहलवानों की तर फाइटर स्प्रिट है। 2018 में बड़े राजनीतिक झटके के बाद चौटाला ने राजनीतिक पार्टी बनाई और चुनाव में 10 सीटें जीतकर भाजपा के साथ सरकार बनाई और डिप्टी सीएम बनकर न सिर्फ अपनी राजनीतिक काबिलियत साबित की, बल्कि अपनी पार्टी को भी मजबूत बनाया। अब हरियाणा के लोग दुष्यंत चौटाला में भूपेंद्र हुड्डा को देखते हैं। ऐसा कहा जाता है कि दुष्यंत चौटाला राजनीतिक भविष्य उज्जवल है। आने वाले दिनों में भूपेंद्र हुड्डा को रिप्लेश करेंगे।
शिक्षा और प्रारंभिक जीवन
दुष्यंत चौटाला ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा हरियाणा और दिल्ली में प्राप्त की। उच्च शिक्षा के लिए वे विदेश गए और कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की। पढ़ाई के दौरान ही उनमें नेतृत्व क्षमता दिखने लगी थी, और वे छात्र जीवन में भी सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहे।
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उपमुख्यमंत्री के रूप में भूमिका
हरियाणा के उपमुख्यमंत्री बनने के बाद दुष्यंत चौटाला ने उद्योग, श्रम, और पंचायत जैसे कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने युवाओं को रोजगार, किसानों की समस्याओं और औद्योगिक विकास को प्राथमिकता दी। उनकी नीतियों और कार्यशैली से हरियाणा की राजनीति में एक नई ऊर्जा देखने को मिली।
युवा नेता के रूप में पहचान
दुष्यंत चौटाला को एक जुझारू और जमीनी नेता के रूप में जाना जाता है। वे हमेशा जनता से सीधे संवाद स्थापित करने में विश्वास रखते हैं। उनकी शैली पारंपरिक राजनीति से अलग है और वे आधुनिक तकनीकों व सोशल मीडिया का भी प्रभावी ढंग से उपयोग करते हैं।
