लोकसभा स्पीकर ओम बिरला, सोर्स- सोशल मीडिया)
No Confidence Motion Against Om Birla: लोकसभा में मंगलवार को विपक्ष स्पीकर ओम बिरला को पद हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाया। 50 से ज्यादा सांसदों ने पक्ष में वोट किया। इसके बाद पीठासीन ने प्रस्ताव पेश करने की परमिशन दे दी। अब इस प्रस्ताव पर 10 घंटे चर्चा चलेगी। विपक्ष ने ओम बिरला पर सदन की कार्यवाही में पक्षपात करने का आरोप लगाया है।
बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने की। उन्होंने कहा कि बजट सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष ने 20 बार राहुल गांधी को रोक-टोका गया। उन्हें बार बार रूलिंग बुक दिखाई गई। उन्होंने अपनी स्पीच में एक आर्टिकल का हवाला दिया। इस पर उन्हें मना किया गया, लेकिन सत्ता पक्ष के सांसदों ने भारत में बैन किताबें सदन में दिखाईं। उनसे कुछ नहीं कहा गया। इस तरह का भेदभाव स्वीकार नहीं है।
कार्यवाही के दौरान कांग्रेस ने स्पीकर की गैर-मौजूदगी में डिप्टी स्पीकर नियुक्त न करने पर सवाल उठाए। कहा कि चेयर पर बैठे जगदंबिका पाल कैसे इस दौरान कार्यवाही चला सकते हैं। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि देश का नेतृत्व कमकोर और बुजदिल है। डिप्टी स्पीकर का पद विपक्ष को देने की परंपरा रही है। 16वीं लोकसभा में NDA में शामिल रहे अन्नाद्रमुक के थंबीदुरई को यह पद दिया गया था, जबकि, 17वीं और 18वीं लोकसभा में किसी को भी डिप्टी स्पीकर नहीं बनाया गया।
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एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने नियमों का हवाला देते हुए पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाया और कहा कि जब स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा हो रही हो, तब स्पीकर को कार्यवाही की अध्यक्षता करने का अधिकार नहीं होता। उन्होंने कहा कि अभी तक डिप्टी स्पीकर नियुक्त नहीं किया गया है और जो व्यक्ति चेयर पर बैठे हैं, वे भी स्पीकर की मंजूरी से ही आए हैं, इसलिए वे इस प्रस्ताव पर कार्यवाही नहीं चला सकते।