‘ईमानदार थे तो वीडियो क्यों डिलीट किया, और...?’, असम CM हिमंता पर जमकर बसरे ओवैसी, जानिए क्या कहा

Asaduddin Owaisi: असदुद्दीन ओवैसी ने असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा के डिलीटेड वीडियो पर 'नरसंहारकारी नफरती भाषण' का आरोप लगाया है। ओवैसी ने सवाल किया कि अगर ईमानदार थे तो वीडियो क्यों डिलीट किया?
Asaduddin Owaisi on himanta vishwa sarma
AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Asaduddin Owaisi Statement: एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ कानूनी मोर्चा खोल दिया है। कथित तौर पर मुसलमानों के खिलाफ हिंसा दिखाने वाले एक 'डिलीटेड वीडियो' को लेकर उन्होंने न केवल पुलिस शिकायत दर्ज कराई है, बल्कि भाजपा-आरएसएस की विचारधारा पर देश को 'थियोक्रेटिक स्टेट' बनाने का आरोप भी लगाया है।

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने शनिवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पर उनके एक कथित वीडियो को लेकर हमला तेज कर दिया। ओवैसी का आरोप है कि इस वीडियो में मुसलमानों के खिलाफ हिंसा को दर्शाया गया था, जिसे उन्होंने 'नरसंहारकारी' करार दिया है।

डिलीट किए वीडियो पर भी दागे सवाल

ओवैसी ने वीडियो को डिलीट किए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने तर्क दिया कि यदि मुख्यमंत्री के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं था और वे ईमानदार थे, तो उस वीडियो को क्यों हटाया गया?, उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि यदि उन्होंने स्वयं ऐसा कोई वीडियो बनाया होता, तो पूरे देश की प्रतिक्रिया बहुत अलग और तीव्र होती। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए हैदराबाद सिटी पुलिस में मुख्यमंत्री सरमा के खिलाफ एक आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई गई है। जिसमें 'नरसंहारकारी नफरती भाषण' के लिए आपराधिक कार्रवाई की मांग की गई है।

'मियां' वाले कमेंट पर भी सीएम को घेरा

ओवैसी ने मुख्यमंत्री सरमा द्वारा कथित तौर पर 'मियां' (मुस्लिम) ऑटो चालकों को कम पैसे देने की बात कहे जाने पर भी गहरी आपत्ति जताई है।, उन्होंने पूछा कि क्या किसी राज्य के मुख्यमंत्री को इस तरह की भाषा शोभा देती है?, ओवैसी के अनुसार, इस तरह की बयानबाजी न केवल समाज में विभाजन पैदा करती है, बल्कि संवैधानिक पद की गरिमा को भी ठेस पहुँचाती है।

'थियोक्रेटिक' नेशन की ओर बढ़ने का दावा

और वंदे मातरम विवाद राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी बात रखते हुए ओवैसी ने 'वंदे मातरम' के इस्तेमाल पर भी टिप्पणी की। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय गीत को किसी की 'वफादारी के परीक्षण' के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी वर्तमान कार्यशैली देश को एक 'थियोक्रेटिक' (धर्मतांत्रिक) नेशन बनने की ओर धकेल सकती है।

जनरल नरवणे की किताब पर क्या बोले ओवैसी

संसद के कामकाज में आ रही बाधाओं पर ओवैसी ने कहा कि जब सदन सुचारू रूप से नहीं चलता है, तो इसका सीधा लाभ सत्ताधारी दल को मिलता है। उन्होंने रिटायर्ड पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की किताब का भी जिक्र किया।

आपको बता दें कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान नरवणे के संस्मरणों के "प्री-प्रिंट" एडिशन से कुछ कहने की कोशिश की थी, जिसका सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध किया था। ओवैसी ने इस बात पर जोर दिया कि वह दस्तावेज एक सार्वजनिक रिकॉर्ड है और सरकार ने पूर्व सेना प्रमुख द्वारा लिखी गई बातों का खंडन नहीं किया है। हालांकि, इस मामले में लोकसभा अध्यक्ष ने व्यवस्था दी कि सदन में अप्रकाशित साहित्य का उपयोग न किया जाए।

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