Explainer: छात्रों को नया लॉलीपॉप या सच में पेपर लीक रोक सकता है नया विधेयक? जानें नए कानून में क्या है खास
NEET Paper Leak Law: मोदी कैबिनेट ने पेपर लीक संशोधन विधेयक को मंजूरी दी है। प्रस्तावित कानून में 10 साल की जेल, 10 करोड़ जुर्माना और तीन महीने में सुनवाई पूरी करने का प्रावधान है।
- Written By: अक्षय साहू
सरकार ने पेपर लीक संशोधन विधेयक को मंजूरी दी (सोर्स- सोशल मीडिया)
Paper Leak Amendment Bill: इस समय नीट पेपर लीक का मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक छाया हुआ है। इसी बीच शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रीमंडल की बैठक में ‘पेपर लीक विधेयक संशोधन’ को मंजूरी मिल गई। सूत्रों के मुताबिक, इस कानून में पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ कड़े प्रावधान किए गए हैं। बताया जा रहा है कि सरकार अगले हफ्ते इस विधेयक को संसद में पेश कर सकती है।
सरकार ने यह फैसला ऐसे समय पर लिया है, जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों छात्र नीट पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन कर रही है। वहीं विपक्ष इस मुद्दे को लेकर संसद में रोज हंगामा कर रहा है। इसके चलते 20 जुलाई से शुरू हुए मानसून सत्र की कार्यवाही ठीक पांच मिनट भी नहीं चल पाई है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सरकार का नया कानून इस पूरे विवाद को शांत कर पाएगा? सरकार द्वारा लाया जा रहा नया कानून क्या है? क्या सच में इस नए कानून से पेपर लीक पर लगाम लाया जा सकता है?
नया पेपर लीक विधेयक क्या है?
केंद्र की मोदी सरकार पेपर लीक को रोकने के लिए नया कानून लाने की तैयारी कर रही है। सरकार इसमें पहले के कानून को और सख्त करते हुए पेपर लीक माफिया पर लगाम लगाना चाहती है। सुत्रों के मुताबिक, सरकार ने पेपर लीक को रोकने के लिए इसमें तीन नए प्रावधान को जोड़ा है। इसमें पेपर लीक मामले में पकड़े जाने वाले अपराधियों को मिलने वाली सजा को पहले और भी सख्त किया गया है।
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संसद में अगले हफ्ते पेपर लीक संशोधन विधेयक पेश कर सकती है सरकार (AI जेनरेटेड इमेज)
पेपर लीक मामलों में 3 महीने के भीतर होगा फैसला
सुत्रों के मुताबिक, नए कानून के तहत पेपर लीक के मामलों की सुनवाई के लिए स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट को कानूनी आधार दिया जाएगा। इन अदालतों को निर्देश होगा कि हर मामले की सुनवाई पूरी कर अधिकतम तीन महीने के भीतर फैसला सुनाया जाए। सरकार का मानना है कि इससे मुकदमे सालों तक लंबित नहीं रहेंगे और दोषियों को जल्द सजा मिल सकेगी।
10 साल की जेल और 10 करोड़ तक जुर्माना
इसके अलावा प्रस्तावित कानून में पेपर लीक को गंभीर अपराध की श्रेणी में शामिल किया गया है। इसके तहत दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि कठोर सजा से पेपर लीक माफियाओं पर लगाम लगेगी और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता बनी रहेगी।
पीएम मोदी ने दिया था बड़ा संदेश
कैबिनेट बैठक से एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार की देर रात इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए पेपर लीक के मुद्दे पर बात की। उन्होंने कहा कि, मैं जानता हूं कि पेपर लीक मामूली विषय नहीं है। लाखों छात्र और उनके अभिभावकों के लिए बहुत ही पीड़ादायक है इसलिए पेपर लीक की घटनाओं से निपटने को लेकर अब तक पिछले ढाई महीने में अनेक कदम उठाए गए। गुनाहगारों को पकड़ा गया है, वे जेल में हैं। हमारा सबसे महत्वपूर्ण जिम्मा था कि छात्रों का एक साल बर्बाद न हो।
More strict actions against paper leaks to come in tomorrow’s Cabinet! pic.twitter.com/NRysBukk5U — Narendra Modi (@narendramodi) July 23, 2026
पीएम मोदी ने आगे कहा कि तत्काल परीक्षा लेना जरूरी था। सरकार ने पूरी शक्ति का प्रयोग करके कम से कम समय में 22 लाख छात्रों की परीक्षा का प्रबंध किया। 5 से 6 दिन पहले, 19 को नतीजे भी आ गए। देश भर में पास हुए छात्रों की खुशियों की खबरें भी आ रही हैं। लेकिन हम संतोष मानने वाले लोगों में से नहीं हैं इसलिए मैंने आज विभागों को निर्देश दिए थे। आज विभागों ने लगातार मेहनत करके देर रात अपने मसौदे दे दिए। फास्ट ट्रैक कोर्ट और कठोर सजा के प्रवधान के साथ मसौदे पर शुक्रवार को कैबिनेट में चर्चा होगी।
फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के दिए निर्देश
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि दोषियों को जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे। उन्होंने संबंधित विभागों को तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। सरकार का कहना है कि नया कानून लागू होने के बाद इन अदालतों के गठन और कामकाज को कानूनी मजबूती मिलेगी।
क्या नए कानून से पेपर लीक पर लगेगी लगाम?
विश्लेषकों के मुताबिक, नए कानून को लेकर फिलहाल कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। क्योंकि सरकार फिलहाल कानून बनने के शुरुआती चरण में है, इस कानून को बनाने के लिए संसद में विपक्ष की भी जरूरत पड़ेगी। विपक्ष पहले ही शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर अड़ा हुआ है। ऐसे में यह कहना काफी मुश्किल है विपक्ष बिना धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के सदन की कार्यवाही को चलने देंगे।
Moment when sonam wangchuk ended his hunger strike. pic.twitter.com/eYFCTpi4Uc — Ankit (@Extreo_) July 23, 2026
हालांकि सरकार के लिए राहत की बात यह है कि नीट पेपर लीक मामले को लेकर पिछले कई दिनों से भूख हड़ताल कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने बीती रात सरकार द्वारा लिखित आश्वासन मिलने के बाद अपना अनशन खत्म कर दिया है। इससे सरकार को विपक्ष के मुकाबले एक राजनीतिक बढ़त तो मिल ही गई है। सरकार अब लोगों को यह संदेश दे सकती है कि वो पेपर लीक रोकने के लिएठोस और प्रभावी कदम उठा रही है। सूत्रों के मुताबिक सरकार ने सोनम वांगचुक को भरोसा दिलाया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
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छात्रों के प्रदर्शन के बीच सरकार का सख्त संदेश
दिल्ली के जंतर-मंतर समेत कई जगहों पर छात्र संगठनों का प्रदर्शन जारी है। ऐसे माहौल में सरकार का कहना है कि नया कानून केवल दोषियों को कड़ी सजा देने के लिए नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली में छात्रों का भरोसा बहाल करने के लिए लाया जा रहा है। सरकार का दावा है कि सख्त कानून, फास्ट ट्रैक कोर्ट और समयबद्ध सुनवाई से भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।
