अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं नहीं करती सही आकलन? स्मृति ईरानी का बड़ा आरोप, बोलीं- भारतीय महिलाओं को करते हैं इग्नोर
Smriti Irani in Navbharat Conclave 2026: स्मृति ईरानी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भारत में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और स्वयं सहायता समूहों के आर्थिक योगदान का सही मूल्यांकन नहीं करतीं।
- Written By: अक्षय साहू
स्मृति ईरानी
Smriti Irani on Women Political Participation: राजधानी दिल्ली में नवभारत द्वारा आयोजित ‘विकसित भारत लीडरशिप कॉन्क्लेव 2026’ में भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने महिला सशक्तिकरण और देश के विकास में महिलाओं की भूमिका पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारत में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और आर्थिक योगदान को दुनिया सही तरीके से नहीं आंकती।
स्मृति ईरानी ने कहा कि कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भारत की उपलब्धियों का सही मूल्यांकन नहीं करतीं। उन्होंने बताया कि एक बार उन्होंने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के सामने यह सवाल उठाया था कि भारत में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को उनकी रिपोर्ट में पूरी तरह शामिल क्यों नहीं किया जाता।
सरकार ने महिलाओं को दिया उचित सम्मान
उनके मुताबिक, भारत में लाखों महिलाएं पंचायतों और जिला परिषदों में चुनी जाती हैं, लेकिन उनकी गिनती अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों में नहीं होती। इसी तरह विधानसभा और अन्य लोकतांत्रिक संस्थाओं में चुनी गई महिलाओं की भागीदारी को भी पर्याप्त महत्व नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम का मानना है कि भारत में राजनीति में महिलाओं को जितनी सहभागिता के मौके दिए हैं, उतना दुनिया के किसी भी देश ने नहीं दिया है।
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कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और स्मृति ईरानी
ईरानी ने कहा कि देश में करीब 15 लाख महिलाएं पंचायतों और जिला परिषदों में जनप्रतिनिधि के रूप में काम कर रही हैं। यदि इन महिलाओं की भागीदारी को वैश्विक आंकड़ों में शामिल किया जाए, तो राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मामले में भारत की रैंकिंग काफी बेहतर हो सकती है। उन्होंने कहा कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के अधिकारियों ने भी माना कि भारत जैसा उदाहरण दुनिया में बहुत कम देखने को मिलता है। यही वजह है कि कई मामलों में भारत की तुलना किसी दूसरे देश से करना आसान नहीं है।
महिलाओं का आर्थिक योगदान भी कम नहीं
भाजपा नेता ने आगे कहा कि महिलाओं का आर्थिक योगदान देश के विकास में बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन उसका सही आकलन नहीं हो पाता। उन्होंने बताया कि आज देश में करीब 9 करोड़ महिलाएं सेल्फ हेल्प ग्रुप (SHG) से जुड़ी हुई हैं। ये महिलाएं गांवों के साथ-साथ आर्थिक रूप से कमजोर शहरी इलाकों में भी छोटे-छोटे कारोबार चलाकर परिवार और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही हैं।
ईरानी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुए मूल्यांकन के अनुसार, भारत की सेल्फ हेल्प ग्रुप से जुड़ी महिलाएं हर साल करीब 35 अरब डॉलर की आर्थिक गतिविधियां पैदा करती हैं। इसके बावजूद उनके योगदान को वैश्विक रिपोर्टों में उतनी प्रमुखता नहीं मिलती, जितनी मिलनी चाहिए।
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महिलाओं के योगदान को सही पहचान देने की जरूरत
अपने संबोधन में स्मृति ईरानी ने कहा कि भारत में महिलाओं ने राजनीति, समाज और अर्थव्यवस्था तीनों क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि देश की महिलाओं की उपलब्धियों को केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें वैश्विक स्तर पर उचित पहचान भी मिलनी चाहिए। उनके अनुसार, विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा, जब महिलाओं की भागीदारी और योगदान का सही सम्मान किया जाएगा।
