मैं अभागा सवर्ण हूं...यूजीसी रूल्स पर कवि कुमार विश्वास का छलका दर्द, रूल वापस लेने का किया समर्थन

Kumar Vishwas on UGC Rules: कवि कुमार विश्वास ने भी अपनी राय रखी है। उन्होंने दिवंगत रमेश रंजन मिश्र की कविता शेयर करते हुए अपनी राय जाहिर की है।
kumar vishwas comment on ugc rules 2026 shares rollback hashtag
कवि कुमार विश्वास (Image- Socila Media)
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Rollback UGC 2026 Regulations: देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में UGC रूल्स 2026 लागू किए जाने के बाद इसका विरोध शुरू हो गया है। एक वर्ग इन नियमों के खिलाफ खुलकर सामने आ रहा है। यह मुद्दा सोशल मीडिया पर भी तेजी से ट्रेंड कर रहा है। इसी बीच यूपी के बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट रहे अलंकार अग्निहोत्री ने इन नियमों के विरोध में अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया, जिससे मामला और गरमा गया है।

इस विवाद पर कवि कुमार विश्वास ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने दिवंगत कवि रमेश रंजन मिश्र की एक कविता की पंक्तियां साझा करते हुए अपनी बात रखी। कुमार विश्वास ने जो पंक्तियां पोस्ट की हैं, वे इस प्रकार हैं-

“चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा, राई लो या पहाड़ लो राजा, मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूँ मेरा, रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा..।”

UGC रूल्स को वापस लेने का समर्थन

इन पंक्तियों के साथ कुमार विश्वास ने #UGC_RollBack हैशटैग भी लगाया है। इसके जरिए उन्होंने उन लोगों का समर्थन किया है, जो UGC रूल्स को वापस लेने या उनमें बदलाव की मांग कर रहे हैं। उनकी इस पोस्ट पर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ यूजर्स ने कहा कि कुमार विश्वास के प्रति उनका सम्मान और बढ़ गया है, जबकि कुछ लोगों ने उनके बयान पर सवाल भी उठाए। कई यूजर्स ने यह भी लिखा कि उन्हें उम्मीद थी कि कुमार विश्वास इस मुद्दे पर जरूर अपनी राय रखेंगे।

अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे से बढ़ा विवाद

गौरतलब है कि यह मामला पिछले कुछ दिनों से लगातार तूल पकड़ रहा है और खासतौर पर सत्ताधारी भाजपा के लिए इसे एक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। एक ओर सवर्ण समाज में नाराजगी की चर्चा है, तो दूसरी ओर यदि नियमों में बदलाव किया जाता है, तो ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग में असंतोष बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

यूपी में यह मुद्दा और ज्यादा गंभीर होता नजर आ रहा है। यहां पीसीएस अधिकारी और तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे ने बहस को और तेज कर दिया है। सबसे बड़ा विरोध इस बात को लेकर है कि नियमों में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि अगर कोई शिकायत झूठी साबित होती है, तो उस पर क्या कार्रवाई होगी। विरोध करने वाले एक वर्ग का कहना है कि यह प्रावधान न होना सवर्णों के खिलाफ प्रतिशोध की भावना को बढ़ावा दे सकता है।

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