सीएम स्टालिन (सोर्स- सोशल मीडिया)
MK Stalin on CBSE Language Policy: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सीबीएसई के नए सिलेबस ढांचे की आलोचना करते हुए इसे सिर्फ शैक्षणिक सुधार नहीं बल्कि भाषाई संतुलन को प्रभावित करने वाली नीति बताया है। स्टालिन ने कहा कि यह बदलाव हिंदी को बढ़ावा देने और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को कमजोर करने की एक सोची-समझी कोशिश है।
अब मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के इस बयान के बाद भाषा नीति को लेकर देशभर में नई बहस छिड़ने की संभावना है, जो आने वाले समय में राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
सीएम स्टालिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति को भारतीय भाषाओं के विकास के नाम पर पेश किया जा रहा है लेकिन असल में यह हिंदी को प्राथमिकता देती है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हिंदी भाषी राज्यों के छात्रों को भी तमिल, तेलुगु या कन्नड़ जैसी भाषाएं सीखना अनिवार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं होता, तो यह नीति एकतरफा है और समानता के सिद्धांत के खिलाफ है। उनके मुताबिक, भाषा के आधार पर इस तरह का भेदभाव देश की विविधता को नुकसान पहुंचा सकता है।
The recently unveiled curriculum framework by the Central Board of Secondary Education, aligned with the National Education Policy 2020, is not an innocent academic reform—it is a calculated and deeply concerning attempt at linguistic imposition that vindicates our long-standing… pic.twitter.com/9sTZKVV7md — M.K.Stalin – தமிழ்நாட்டை தலைகுனிய விடமாட்டேன் (@mkstalin) April 4, 2026
मुख्यमंत्री स्टालिन ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्रीय विद्यालयों में तमिल भाषा को अनिवार्य नहीं बनाया गया है और वहां तमिल पढ़ाने वाले शिक्षकों की भी कमी है। उन्होंने इसे केंद्र सरकार की “दोहरी नीति” करार दिया। स्टालिन ने कहा कि एक ओर भाषाओं के संरक्षण और विकास की बात की जाती है लेकिन दूसरी ओर जरूरी संसाधन और व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई जाती। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार की नीयत पर सवाल उठते हैं।
यह भी पढ़ें: ‘चुनाव आयोग जैसी संस्थानों को स्वतंत्र होकर काम करना चाहिए…’, SC की जज BV Nagarathna ने कही बड़ी बात
यह बयान ऐसे समय में आया है जब सीबीएसई 2026-27 सत्र से नई तीन-भाषा नीति लागू करने जा रहा है। इस नीति के तहत कक्षा 6 से छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होंगी। स्टालिन ने इस मुद्दे पर तमिलनाडु राज्य में एआईएडीएमके और एनडीए के सहयोगी दलों से भी अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की नीतियां भारत की भाषाई विविधता और सांस्कृतिक पहचान के लिए खतरा बन सकती हैं।