मौलाना महमूद मदनी, फोटो- सोशल मीडिया
Maulana Mahmood Madani Controversy: जमीयत उलमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी के एक कार्यक्रम में दिए गए बयान पर देशभर में राजनीति गरमा गई है। भोपाल में शनिवार को उन्होंने कहा कि “जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा” और इस दौरान उन्होंने सुप्रीम कोर्ट पर भी विवादित टिप्पणी की।
मौलाना महमूद मदनी के विवादित बयान, जिसने देशभर में राजनीति गरमा दी है, में उन्होंने यह दावा किया कि एक समुदाय को कानूनी तौर पर कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस समुदाय को “सामाजिक रूप से अलग-थलग” और “आर्थिक रूप से बेदखल” किया जा रहा है। उनके इस बयान के बाद बीजेपी से लेकर कांग्रेस, शिवसेना और जेडीयू तक ने उन पर निशाना साधा।
बीजेपी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने मौलाना मदनी के बयान को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी। नकवी ने आरोप लगाया कि ऐसे बयान समाज में सांप्रदायिक दंगा भड़काने के उद्देश्य से दिए गए हैं। उन्होंने जनता से “सफेदपोश आतंक के सरगनाओं” की साजिश से सावधान रहने का आग्रह किया।
नकवी ने कहा कि ऐसे लोग न तो मानवता के हितैषी हैं, न देश के हितैषी हैं, न ही किसी धर्म के हितैषी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मदनी का बयान देश और उसके सम्मान के प्रति उनकी विकृत मानसिकता को दर्शाता है, और उनकी सांप्रदायिक साजिश वाली सोच का उद्देश्य पूरी तरह से समाज में विभाजन और संघर्ष पैदा करना है।
कांग्रेस नेता शमा मोहम्मद ने मदनी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उनसे सवाल किया कि तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले में क्या गलत था। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह (तीन तलाक) कुरान शरीफ में भी नहीं है। शमा मोहम्मद ने मौलाना मदनी से अपने अनुयायियों को “गलत इस्लाम का उपदेश देना बंद” करने को कहा और इसे ‘हराम’ बताया।
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वहीं, शिवसेना नेता शाइना एनसी ने मौलाना मदनी को समाज का तथाकथित ठेकेदार बताते हुए आरोप लगाया कि वे हमेशा गलत सलाह देते हैं। उन्होंने पूछा कि क्या मुस्लिम महिलाओं के सम्मान के लिए सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक पर जो फैसला दिया, वह प्रतिगामी था। शाइना एनसी ने स्वीकार किया कि जिहाद शब्द का दुरुपयोग हुआ है, लेकिन उन्होंने मौलाना मदनी से “मुस्लिम वर्ग को भड़काना बंद” करने की अपील की।
मौलाना मदनी के भाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए जेडीयू नेता नीरज कुमार ने राष्ट्रीय प्रतीकों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि चाहे वह वंदे मातरम हो या राष्ट्रगान, इस पर किसी को असहमति नहीं हो सकती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज या राष्ट्रगान से कौन असहमत हो सकता है, क्योंकि यह देश सबका है, और सभी ने स्वतंत्रता प्राप्त करने और लोकतंत्र को कायम रखने में भूमिका निभाई है। उनके अनुसार, वंदे मातरम या भारत माता जी की जय के नारे लगाना हिंदुस्तानी कौम की निशानी है।