जन्मदिन विशेष: जब महात्मा गांधी ने गोद में उठाकर कहा था सूरज-चांद, मणिशंकर अय्यर के जीवन से जुड़ी अनसुनी बातें
Mani Shankar Aiyar: लाहौर में जन्म, IFS की नौकरी और राजीव गांधी के साथ राजनीति का सफर। जानिए मणिशंकर अय्यर से जुड़े अनसुने किस्से।
- Written By: सजल रघुवंशी
मणिशंकर अय्यर (सोर्स- सोशल मीडिया)
Mani Shankar Aiyar Birthday Special: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर का जन्म 10 अप्रैल 1941 को लाहौर (पाकिस्तान) में हुआ था। एक कुशल राजनेता, पूर्व राजनयिक और लेखक के रूप में उनकी पहचान बहुआयामी रही है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में शामिल अय्यर ने अपने जीवन में कूटनीति और राजनीति दोनों क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उनका जीवन केवल पदों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विचारधाराओं और अनुभवों से भी गहराई से जुड़ा रहा है। मणिशंकर अय्यर का जीवन इस बात का उदाहरण है कि कैसे विचार, अनुभव और नेतृत्व किसी व्यक्ति की पहचान को गहराई से आकार देते हैं
राजनयिक से राजनेता बनने का सफर
बहुत कम लोग जानते हैं कि मणिशंकर अय्यर भारतीय विदेश सेवा (IFS) के अधिकारी थे और उन्होंने कई देशों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। कूटनीतिक जीवन के दौरान उनकी पहचान एक प्रभावशाली अधिकारी के रूप में बनी। हालांकि, उनकी जिंदगी में बड़ा मोड़ तब आया जब उनकी नजदीकी राजीव गांधी से बढ़ी। कहा जाता है कि राजीव गांधी के कहने पर ही उन्होंने विदेश सेवा छोड़कर सक्रिय राजनीति में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस पार्टी के साथ जुड़कर देश की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई।
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Mani Shankar Aiyar with Rajiv Gandhi
पाकिस्तान से जुड़ा अनुभव
मणिशंकर अय्यर ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में पाकिस्तान में राजनयिक के रूप में सेवाएं दीं। पाकिस्तान में आम चुनाव 2024 के बीच उनकी टिप्पणी काफी ज्यादा चर्चा का विषय बनी थी मणिशंकर अय्यर ने पाकिस्तान के आतिथ्य की जमकर सराहना की थी। उन्होंने कहा था कि किसी और देश में उनका इतने खुले दिल से स्वागत नहीं हुआ। बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में अय्यर पाकिस्तान में राजनयिक के रूप में सेवाएं दे चुके हैं।
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गांधी-नेहरू-राजीव विचारधारा का प्रभाव
मणिशंकर अय्यर की राजनीतिक सोच पर महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और राजीव गांधी के विचारों की गहरी छाप रही है। उन्होंने अपने बचपन का एक दिलचस्प किस्सा साझा करते हुए बताया था कि जब वह छह साल के थे, तब महात्मा गांधी ने उन्हें और उनके भाई को गोद में उठाकर ‘मेरी आंखों के सूरज और चांद’ कहा था। उन्होंने यह भी कहा कि बड़े होते समय उन पर नेहरूवादी विचारधारा का गहरा प्रभाव पड़ा, जबकि राजीव गांधी के साथ काम करने के अनुभव ने उन्हें बेहद प्रेरित किया।
