Malegaon Blast Case में आज आएगा फैसला, साध्वी प्रज्ञा ठाकुर का क्या होगा?
Malegaon Blast Case Verdict Today: राष्ट्रीय जांच एजेंसी की एक विशेष अदालत आज मालेगांव विस्फोट मामले में फैसला सुनाएगी। 29 सितंबर 2008 को हुए इस हमले में छह लोगों की जान गई थी।
- Written By: अर्पित शुक्ला
Malegaon Blast Case में आज आएगा फैसला (कॉन्सेप्ट फोटो)
Malegaon Blast Case: 2008 के मालेगांव ब्लास्ट मामले में आज यानी गुरुवार बड़ा दिन है। NIA की स्पेशल कोर्ट आज इस मामले में फैसला सुना सकती है। इस मामले में आरोपी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के वकील जेपी मिश्रा को उम्मीद है कि सच की जीत होगी। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि 31 जुलाई को फैसला सुनाया जाएगा। मामले में मजबूत तैयारी और जिस तरह से झूठे सबूत पेश किए गए, उसके आधार पर मुझे विश्वास है कि न्याय होगा और सच्चाई की जीत होगी क्योंकि सच्चाई कभी छिप नहीं सकती। निर्दोष लोगों को न्याय जरूर मिलेगा।
मामले में देरी क्यों हुई?
साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के वकील जेपी मिश्रा ने इस मामले में देरी के कारणों को विस्तार से बताते हुए कहा कि शुरुआत में महाराष्ट्र एटीएस ने 12 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। अदालत ने 5 लोगों को आरोपमुक्त कर दिया, जिसमें 3 पूरी तरह से और 2 आंशिक रूप से आरोपमुक्त हुए। राकेश धावड़े और जगदीश चिंतामणि मते के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामले पुणे और कल्याण सत्र न्यायालय में स्थानांतरित कर दिए गए। फिलहाल साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित समेत 7 लोग मुकदमे का सामना कर रहे हैं।
गवाह का बहुत ज्यादा समय लेना
मिश्रा के मुताबिक देरी की वजह 323 लोगों की गवाही और एक गवाह का बहुत ज्यादा समय लेना था। शुरुआत में 2008 से 2016 तक कोई प्रगति नहीं हुई। एटीएस ने मकोका (महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम) लगाया, लेकिन किसी भी आरोपी के खिलाफ दो आरोप पत्र नहीं थे, जो मकोका के लिए जरूरी है।
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2011 में मामला एनआईए को सौंप दिया गया और 2016 में एनआईए ने आरोप पत्र दाखिल किया, जिसमें प्रज्ञा ठाकुर समेत कुछ को क्लीन चिट दे दी गई, लेकिन अदालत ने उनको मुकदमे का सामना करने का आदेश दिया।
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सभी आरोपियों को आज कोर्ट में पेश होना होगा
उन्होंने कहा कि सभी आरोपियों का 31 जुलाई को कोर्ट में पेश होना अनिवार्य है साक्ष्य एकत्र करने का अर्थ है जाँच के दौरान निष्पक्ष रूप से तथ्य, गवाह और भौतिक साक्ष्य एकत्र करना, जैसे अपराध स्थल से उंगलियों के निशान, विस्फोटक अवशेष या गवाहों के बयान। वहीं, साक्ष्य गढ़ने का अर्थ है गलत तरीके से फर्जी साक्ष्य तैयार करना, जैसे गवाहों पर झूठे बयान देने के लिए दबाव डालना, दस्तावेजों से छेड़छाड़ करना या साक्ष्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना। मिश्रा का कहना है कि इस मामले में झूठे साक्ष्य पेश किए गए, जिसके आधार पर उन्हें पूरा विश्वास है कि गुरुवार को NIA की स्पेशल कोर्ट के फैसले में सच्चाई सामने आएगी और सत्य की जीत होगी।
