Mahashivratri: हाईकोर्ट पहुंचे भगवान भोलेनाथ तो मिली मंदिर का मेन गेट खोलने की इजाजत, चंडीगढ़ से सामने आया चौंकाने वाला मामला

चंडीगढ़ हाई कोर्ट की खंडपीठ ने मंदिर के देवता भगवान शिव द्वारा अधिवक्ता दिनेश कुमार मल्होत्रा ​​और अधिवक्ता सक्षम मल्होत्रा ​​के माध्यम से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया है।
Mahashivratri: हाईकोर्ट पहुंचे भगवान भोलेनाथ तो मिली मंदिर का मेन गेट खोलने की इजाजत, चंडीगढ़ से सामने आया चौंकाने वाला मामला
कॉन्सेप्ट फोटो (डिजाइन)
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चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने बुधवार को चंडीगढ़ स्थित प्राचीन शिव मंदिर के मुख्य द्वारों को 2 मार्च को महाशिवरात्रि समारोह और लंगर सेवा के लिए अस्थायी रूप से खोलने का आदेश दिया है। न्यायालय ने निर्देश दिया है कि इस दौरान सैन्य पुलिस की निगरानी में भीड़ का प्रबंधन किया जाएगा। इसके बाद द्वार फिर से बंद कर दिए जाएंगे।

न्यायमूर्ति सुरेश ठाकुर और न्यायमूर्ति विकास सूरी की खंडपीठ ने मंदिर के देवता भगवान शिव द्वारा अधिवक्ता दिनेश कुमार मल्होत्रा ​​और अधिवक्ता सक्षम मल्होत्रा ​​के माध्यम से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि त्योहार के दौरान द्वारों को सील करने से भक्तों की भारी भीड़ के कारण भगदड़ मच सकती है।

क्या है पूरा मामला?

चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से पेश अतिरिक्त स्थायी वकील पीएस कंवर और स्थायी वकील दीपक मल्होत्रा ​​ने अदालत को बताया कि सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम, 1971 के तहत बेदखली आदेश के अनुपालन में मंदिर परिसर को अपने कब्जे में ले लिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बेदखली आदेश की वैधता या मंदिर समिति के अधिकार पर विचार किए बिना अदालत ने कहा कि यह आदेश केवल आगामी महा शिवरात्रि उत्सव के मद्देनजर है, जो आज यानी 26 फरवरी को थी।

2 मार्च को 'लंगर सेवा'

इसके साथ ही कि 2 मार्च को मंदिर परिसर में 'लंगर सेवा' आयोजित की जानी है, ताकि मंदिर स्थल पर किसी भी भगदड़ को रोका जा सके, जो मंदिर की ओर जाने वाले द्वारों के संकरे होने के कारण हो सकती है, जबकि मुख्य मंदिर के मुख्य द्वार की चौड़ाई संबंधित मंदिर के अंदर भक्तों के सुचारू प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त है।"

अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि मंदिर में आने वाली भीड़ का प्रबंधन 25 फरवरी से 2 मार्च तक सैन्य पुलिस की निगरानी में किया जाएगा। आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि इस समयावधि के बाद मंदिर के मुख्य द्वार बंद कर दिए जाएंगे।

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