पी. जयराज और उनके बेटे जे. बेनिक्स, (सोर्स- सोशल मीडिया)
Sathankulam Custodial Death Case: तमिलनाडु के बहुचर्चित जयराज-बेनिक्स हिरासत मौत मामले में सोमवार को मदुरै डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने अपना अंतिम फैसला सुना दिया है। अदालत ने दोषियों के प्रति कोई नरमी न दिखाते हुए इंस्पेक्टर श्रीधर सहित 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई है। इस मामले की गंभीरता का अंदाजा कोर्ट की उस टिप्पणी से लगाया जा सकता है जिसमें बेंच ने कहा कि पिता और बेटे को बदले की भावना से निर्वस्त्र कर बेरहमी से पीटा गया था, जिसे पढ़कर ही दिल कांप उठता है। मुख्य दोषी इंस्पेक्टर श्रीधर पर फांसी के साथ 15 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
यह पूरा मामला जून 2020 का है, जब लॉकडाउन के दौरान सथानकुलम में मोबाइल की दुकान चलाने वाले पी. जयराज और उनके बेटे जे. बेनिक्स को पुलिस ने समय से अधिक दुकान खुली रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था। हिरासत के दौरान पुलिसिया बर्बरता के कारण दोनों की मौत हो गई थी।
इसके बाद मद्रास हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद राज्य की सीबी-सीआईडी से जांच का जिम्मा संभालने वाली सीबीआई ने इस मामले में 10 पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गए लोगों में एक इंस्पेक्टर, दो सब-इंस्पेक्टर और कई कांस्टेबल शामिल थे। बाद में एजेंसी ने आरोपी अधिकारियों के खिलाफ हत्या का आरोप लगाया।
सीबीआई ने इस मामले की जांच करते हुए अदालत से अधिकतम सजा (फांसी) की मांग की थी। कोर्ट ने माना कि यदि न्यायिक निगरानी और पुख्ता सीसीटीवी फुटेज नहीं होते, तो शायद सच कभी सामने नहीं आता। सजा पाने वालों में सब-इस्पेक्टर और कांस्टेबल स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह फैसला ईमानदार पुलिसकर्मियों में डर पैदा करने के लिए नहीं, बल्कि वर्दी की आड़ में कानून तोड़ने वालों को कड़ा सबक सिखाने के लिए है।
यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार के लिए न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, बल्कि यह पूरे देश में पुलिस हिरासत में होने वाली घटनाओं पर एक सख्त संदेश भी देता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, चाहे वह कानून लागू करने वाली एजेंसियां ही क्यों न हों।
यह भी पढ़ें: खूब छलके जाम, लगे ठुमके…गंगा नदी में बिरयानी पार्टी के बाद अब सामने आई ‘बियर पार्टी’, देखें VIDEO
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पुलिस हिरासत में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए और क्या कदम उठाए जाने चाहि। यह मामला लंबे समय तक चर्चा में रहा और अब आए इस फैसले ने इसे फिर से सुर्खियों में ला दिया है।