भारत के सबसे बड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट का डेटा लीक, कंट्रोल रूम का लेआउट डार्क वेब पर अपलोड! दावे से हड़कंप
Nuclear Power Plant Data Leak: भारत के कुडनकुलम परमाणु संयंत्र से जुड़े कथित संवेदनशील दस्तावेज डार्क वेब पर अपलोड होने का दावा किया गया है। सरकारी पुष्टि नहीं हुई, CERT-In जांच में जुटी।
- Written By: अर्पित शुक्ला
न्यूक्लियर पावर प्लांट (Image- Social Media)
Nuclear Power Plant Data Leak on Dark Web: भारत के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट से जुड़े कथित संवेदनशील दस्तावेज डार्क वेब पर अपलोड किए जाने का दावा सामने आया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, रैनसमवेयर ग्रुप वर्ल्डलीक्स ने संयंत्र से संबंधित हजारों फाइलें सार्वजनिक करने का दावा किया है। हालांकि, इन दस्तावेजों की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और सरकारी एजेंसियों की ओर से भी अब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
क्या-क्या लीक होने का दावा?
रिपोर्ट के अनुसार, डार्क वेब पर अपलोड की गई करीब 8.58 लाख फाइलों में से लगभग 19 हजार फाइलें बेहद संवेदनशील बताई जा रही हैं। इनमें कथित तौर पर यूनिट-3 और यूनिट-4 के वेंटिलेशन और कूलिंग सिस्टम के ब्लूप्रिंट, कॉमन कंट्रोल रूम का फ्लोर लेआउट, सप्लायर सूची, निरीक्षण रिपोर्ट और बीमा से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं।
रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और Yotta का क्या कहना है?
वर्ल्डलीक्स का दावा है कि यह डेटा रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा है। कंपनी ने स्वीकार किया है कि उसके एक थर्ड-पार्टी डेटा सेंटर प्रदाता Yotta के सर्वर पर डेटा में आंशिक सेंध लगी थी। कंपनी ने कहा कि घटना की जानकारी संबंधित सरकारी एजेंसियों को दे दी गई है, लेकिन प्रभावित डेटा का विवरण सार्वजनिक नहीं किया।
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वहीं Yotta के अनुसार, 29 मई को संदिग्ध गतिविधि का पता चलते ही उसे रोक दिया गया था। बाद में रिलायंस ने कंपनी को बताया कि बाहरी साइबर हमलावर डेटा चोरी का दावा कर रहे हैं। Yotta का कहना है कि वह इन दावों की पुष्टि नहीं कर पाया है, लेकिन तकनीकी जांच रिपोर्ट रिलायंस को सौंप दी गई है।
जांच में जुटीं एजेंसियां
खबरों के मुताबिक, न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCIL) इस मामले में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के संपर्क में है। वहीं भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In भी पूरे मामले की जांच कर रही है। हालांकि, परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE), NPCIL, CERT-In और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
सुरक्षा विशेषज्ञों ने जताई चिंता
न्यूक्लियर थ्रेट इनिशिएटिव (NTI) के वरिष्ठ निदेशक निकोलस रोथ का कहना है कि यदि ऐसे तकनीकी दस्तावेज वास्तव में गलत हाथों में पहुंचते हैं, तो उनसे संयंत्र की सहायक प्रणालियों, सप्लाई चेन और सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों का अंदाजा लगाया जा सकता है, जो सुरक्षा के लिहाज से गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
पहले भी साइबर हमलों में आया था नाम
यह पहली बार नहीं है जब कुडनकुलम परमाणु संयंत्र साइबर सुरक्षा से जुड़ी खबरों में आया हो। वर्ष 2019 में भी संयंत्र के प्रशासनिक नेटवर्क पर उत्तर कोरिया से जुड़े एक हैकर समूह के मैलवेयर का पता चला था।
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इसी बीच, साइबर सुरक्षा कंपनी Surfshark की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष भारत में 2.89 करोड़ ऑनलाइन खातों का डेटा लीक हुआ था, जिससे डेटा उल्लंघन के मामलों में भारत दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल रहा।
