Chhatrapati Shivaji Maharaj: 8 पत्नियां और संभाजी जैसा शूरवीर पुत्र, यहां जानिए छत्रपति शिवाजी महाराज के परिवार का गौरवशाली इतिहास
Chhatrapati Shivaji Maharaj: हर साल 19 फरवरी को हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज की जंयती मनाई जाती है। आइए जानते है महाराज व उनके परिवार के बारे में...
- Written By: आकाश मसने
माता जीजाबाई के साथ छत्रपति शिवाजी महाराज (डिजाइन फोटो)
Chhatrapati Shivaji Maharaj: छत्रपति शिवाजी महाराज को पूरे महाराष्ट्र का ‘आराध्य दैवत’ माना जाता हैं। हर साल 19 फरवरी को हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज की जंयती मनाई जाती है। छत्रपति शिवाजी महाराज माता-पिता और बेटों के बारे में सब जानते है। लेकिन क्या आप उनकी पत्नियों के बारे में जानते हैं?
छत्रपति शिवाजी महाराज की 395वीं जयंती के अवसर पर हम उनकी वीरता और साहस को याद करने से खुद को रोक नहीं सकते। 19 फरवरी को उनकी जयंती के इस अवसर के लिए हर जगह तैयारियां शुरू हो गई हैं। इससे पहले हम आपको छत्रपति शिवाजी महाराज व उनके परिवार के बारे में अवगत कराते हैं…
छत्रपति शिवाजी महाराज की पत्नियां
छत्रपति शिवाजी महाराज की 8 पत्नियां थी। उनका नाम- सईबाई, सोयराबाई, पुतलाबाई, सक्वरबाई, काशीबाई जाधव, सगुणाबाई, लक्ष्मीबाई और गुणवतीबाई है। उनको दाे पुत्र हुए संभाजी महाराज और राजाराम प्रथम। वहीं उनकी पुत्रियों का नाम सखुबाई, रानूबाई, अम्बिकाबाई, दीपाबाई, कमलाबाई तथा राजकुंवरी बाई था।
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छत्रपति शिवाजी महाराज व उनकी पत्नियां (डिजाइन फोटो)
शिवाजी महाराज का जन्म
छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म महाराष्ट्र के पुणे स्थित शिवनेरी के पहाड़ी किले में हुआ था। शिवाजी महाराज का बचपन का नाम शिवाजी भोंसले था। एक किंवदंती के अनुसार, जीजाबाई ने शिवनेरी किले में देवी शिवाई से एक शक्तिशाली पुत्र की प्रार्थना की थी, जिसके कारण लड़के का नाम ‘शिवाजी’ रखा गया था।
शिवाजी के पिता शाहजीराजे भोंसले एक मराठा सेनापति थे जो दक्कन सल्तनत में सेवारत थे। साथ ही, उनकी मां जीजाबाई सिंदखेड के लखुजी जाधवराव की बेटी थीं। शिवाजी महाराज मराठा परिवार और भोसले वंश के राजा थे।
माता जीजाबाई ने किया पालन-पोषण
छत्रपति शिवाजी महाराज की माता का नाम जीजाबाई व पिता का नाम शाहजी भोंसले था। माता जीजाबाई ने महाराज का पालन-पोषण किया। उन्होंने उन्हें बहुत सुंदर संस्कार दिए। उनके संस्कारों का गुणगान आज भी हर घर में किया जाता है। जीजाबाई और महाराज का मां-बेटे का रिश्ता भी बहुत खास था। जीजाबाई ने उन्हें बचपन से ही रामायण, महाभारत और अन्य भारतीय नायकों की गौरवशाली कहानियां सुनाकर और सिखाकर उनका पालन-पोषण किया।
छत्रपति शिवाजी महाराज की की पत्नियां व विवाह की तारीख
| पत्नी का नाम | विवाह की दिनांक | संतानों के नाम |
|---|---|---|
| सईबाई | 16 मई 1640, लाल महल (पुणे) | सखुबाई, रानूबाई, अम्बिकाबाई, संभाजी महाराज |
| सोयराबाई | 1660 | दीपाबाई, राजाराम प्रथम |
| पुतलाबाई | 1653 | निःसंतान |
| सक्वरबाई | जनवरी 1656 | कमलाबाई |
| काशीबाई जाधव | 8 अप्रैल 1657 | अज्ञात |
| सगुणाबाई | अज्ञात | राजकुंवरी बाई |
| लक्ष्मीबाई | अज्ञात | अज्ञात |
| गुणवतीबाई | अज्ञात | अज्ञात |
छत्रपति शिवाजी महाराज के भाई
छत्रपति शिवाजी महाराज दो भाई थे संभाजी शाहजी भोसले और व्यंकोजी भोसले। शिवाजी महाराज के बेटे संभाजी महाराज की पत्नी का नाम येसूबाई और राजाराम की पत्नी का नाम ताराबाई था। शिवाजी महाराज के दो पौत्र थे शाहू महाराज व शिवाजी द्वितीय।
छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन से क्या सीख मिलती है?
छत्रपति शिवाजी महाराज का निधन 3 अप्रैल 1680 काे रायगढ के किले में हुआ। उनका का नाम महाराष्ट्र ही नहीं बल्कि पूरे भारत में सम्मान से लिया जाता हैं। उनके जीवन की सबसे बड़ी सीख उनका स्वाभिमान, अनुशासन और साहस है। उन्होंने हर क्षेत्र में आत्मविश्वास से काम किया।
