सिद्धारमैया, मल्लिकार्जुन खरगे, डीके शिवकुमार (फोटो- सोशल मीडिया)
बेंगलुरू: कर्नाटक कांग्रेस सरकार के 2 बड़े नेता शक्ति स्कीम को लेकर आमने सामने हो गए हैं। दोनों नेताओं की लंबे समय से चली आ रही खींचतान को देखते हुए कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने कर्नाटक सरकार को नसीहत दी है। दरअसल डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने महिलाओं के लिए चल रही शक्ति स्कीम को लेकर कहा कि सरकार इस पर पुनर्विचार करेगी, क्योंकि राज्य की कुछ महिलाएं मुफ्त यात्रा करना चाहती हैं।
डिप्टी सीएम के बयान को लेकर भाजपा ने कर्नाटक सरकार पर वादे से पीछे हटने का आरोप लगाने लगी। इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी राज्य सरकार की खिंचाई कर दी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि चुनाव के दौरान कोई भी ऐसे वादे न किए जाएं, जिसे पूरा न किया जा सके या फिर राज्य आर्थिक बोझ तले दब जाए।
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कांग्रेस की 5 गारंटियां
गौरतलब है कि कांग्रेस ने कर्नाटक चुनाव में 5 गारंटियां दी थीं। जिसमें गृह लक्ष्मी योजना के तहत महिलाओं को हर महीने 2 हजार रुपये, युवा निधि के तहत बेरोजगार ग्रेजुएट्स को दो साल के लिए 3 हजार रुपये व डिप्लोमाधारकों को 1500 रुपये, अन्न भाग्य योजना में गरीबी रेखा के नीचे हर परिवार को हर महीने प्रति व्यक्ति 10 किलोग्राम चावल और शक्ति स्कीम के तहत महिलाओं के लिए सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा और गृह ज्योति योजना के तहत हर घर को 200 यूनिट मुफ्ट बिजली शामिल है, लेकिन अब डिप्टी सीएम के शक्ति स्कीम पर पुनर्विचार के बयान से सियासत शुरू हो गई है।
शक्ति स्कीम पर अब तक कितना हुआ खर्च ?
कांग्रेस सरकार की शक्ति स्कीम एक महत्वपूर्ण स्कीम है। जिसके तहत महिलाओं को बसों में फ्री यात्रा की सुविधा दी जाती है। यह स्कीम राज्य में कांग्रेस सरकार बनने के बाद शुरू हुई थी। इस स्कीम के तहत 18 अक्टूबर, 2024 तक राज्य ने महिलाओं द्वारा 311.07 करोड़ मुफ़्त सवारी के लिए शक्ति योजना पर ₹7,507.35 करोड़ खर्च किए हैं। हालांकि, ‘शक्ति स्कीम’ को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है। विपक्ष और कुछ विश्लेषकों का कहना है कि यह सरकारी बजट पर अत्यधिक भार डाल रही है और सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग हो सकता है।
स्कीम पर पुनर्विचार का कोई इरादा नहीं: सीएम
वहीं शक्ति स्कीम लेकर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का बयान आया है। उन्होंने कहा कि सरकार के सामने ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं आया है। डिप्टी सीएम ने केवल वही कहा जो कुछ महिलाएं कह रही हैं। सरकार के स्तर पर इस पर पुनर्विचार करने की कोई स्थिति नहीं है। ऐसा कोई इरादा नहीं है, ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है”
डीके शिवकुमार की सफाई
बता दें कि बुधवार को शिवकुमार ने कहा कि कुछ महिलाओं ने उन्हें ट्वीट और ईमेल करके बसों में यात्रा के लिए पैसे देने की इच्छा जताई है। महिलाओं ने कहा कि वे मुफ़्त यात्रा नहीं चाहती हैं। डिप्टी सीएम ने कथित तौर पर कहा, “लगभग 5 से 10 प्रतिशत महिलाओं का कहना है कि कंडक्टर टिकट के पैसे नहीं ले रहे हैं, भले ही वे स्वेच्छा से ऐसा करती हो।