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Kerala Election 2026: तिरुवनंतपुरम की नेमम विधानसभा सीट अब केवल एक निर्वाचन क्षेत्र नहीं, बल्कि केरलम की राजनीति का एक बड़ा ‘मेटाफर’ बन चुकी है। इसे अक्सर “केरलम का गुजरात” कहा जाता है, क्योंकि यही वह एकमात्र सीट थी जिसने 2016 में भाजपा को पहली बार केरलम विधानसभा का रास्ता दिखाया था।
जैसे-जैसे 9 अप्रैल 2026 की वोटिंग तारीख नजदीक आ रही है, यहां की गलियों में सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं। नेमम की कहानी एक समय के कांग्रेस के मजबूत किले के ढहने, लेफ्ट के उभार और भाजपा द्वारा कांग्रेस की जमीन पर अपना आधार बढ़ाने की दिलचस्प दास्तान है। इस बार मुकाबला त्रिकोणीय है और 4 मई को आने वाले नतीजे यह तय करेंगे कि इस ‘सियासी बिसात’ पर आखिरी हंसी कौन हंसेगा।
साल 2011 से पहले नेमम पूरी तरह से कांग्रेस का गढ़ माना जाता था, जहां एन. सख्तन ने लगातार दो बार जीत दर्ज की थी। लेकिन 2008 के परिसीमन ने इस क्षेत्र का भूगोल और इतिहास दोनों बदल दिए। परिसीमन के बाद हुए पहले चुनाव में ही कांग्रेस का वोट बैंक इस कदर गिरा कि यहां मुकाबला सीधा एलडीएफ और भाजपा के बीच सिमट गया।
2016 में भाजपा के दिग्गज नेता ओ. राजगोपाल ने यहां ऐतिहासिक जीत दर्ज की, जिसने भाजपा को राज्य में एक नई पहचान दी। हालांकि, 2021 में सीपीआई (एम) के वी. शिवनकुट्टी ने एक बेहद करीबी मुकाबले में भाजपा से यह सीट वापस छीन ली थी। आज नेमम एक ऐसा क्षेत्र है जहां मतदाता विकास और विचारधारा के बीच संतुलन तलाश रहा है।
इस बार के चुनाव में उम्मीदवारों का प्रोफाइल किसी हाई-वोल्टेज ड्रामा से कम नहीं है। सत्तारूढ़ लेफ्ट ने एक बार फिर वर्तमान विधायक और शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी पर भरोसा जताया है। उन्हें स्थानीय स्तर पर “शिवनकुट्टीअन्नन” के नाम से जाना जाता है और उनकी छवि एक जमीन से जुड़े नेता की है। दूसरी तरफ, भाजपा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और टेक्नोक्रेट राजीव चंद्रशेखर को मैदान में उतारा है।
राजीव चंद्रशेखर की ताकत यह है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में वे नेमम विधानसभा क्षेत्र में शशि थरूर से करीब 22,126 वोटों से आगे रहे थे। वहीं, कांग्रेस ने युवा चेहरा के.एस. साबरिनाथन को उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। साबरिनाथन पूर्व विधानसभा अध्यक्ष जी. कार्तिकेयन के बेटे हैं और उनकी छवि युवाओं और मध्य वर्ग के बीच काफी लोकप्रिय है।
नेमम के मतदाताओं के लिए बुनियादी ढांचा और विकास सबसे बड़े मुद्दे हैं। यहां का सबसे चर्चित मुद्दा ‘नेमम रेलवे कोचिंग टर्मिनल’ प्रोजेक्ट है। ओ. राजगोपाल के समय शुरू हुए इस प्रोजेक्ट के धीमे पड़ने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है, जिसे भाजपा इस बार फिर से जोर-शोर से उठा रही है। मतदाताओं की नजरें जल निकासी, कचरा प्रबंधन और बेहतर यातायात सुविधाओं पर भी टिकी हैं।
भाजपा का दावा है कि केंद्र और नगर निगम (जहां भाजपा का मेयर है) के बीच तालमेल होने से नेमम का तेजी से विकास होगा। वहीं, लेफ्ट सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और शिक्षा के क्षेत्र में हुए सुधारों को शिवनकुट्टी अपनी जीत का मुख्य आधार बना रहे हैं। साबरिनाथन अपनी पारिवारिक विरासत और संगठनात्मक मजबूती के जरिए नायर और अल्पसंख्यक वोटों को साधने की कोशिश कर रहे हैं।
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नेमम का चुनावी गणित पूरी तरह से जातिगत समीकरणों पर टिका है। यहां करीब 35% नायर समुदाय, 15% मुस्लिम और काफी संख्या में नादर और ईझवा समुदाय के मतदाता हैं। उच्च जाति के हिंदुओं के ध्रुवीकरण ने ही भाजपा को यहां पैर जमाने का मौका दिया है।
दिलचस्प बात यह है कि नादर समुदाय का सामाजिक संगठन (VSDP) इस बार राजीव चंद्रशेखर का समर्थन कर रहा है, जो भाजपा के लिए संजीवनी साबित हो सकता है। लेकिन साबरिनाथन की मौजूदगी ने भाजपा के लिए नायर वोटों में सेंध लगने का खतरा पैदा कर दिया है। अंततः जीत उसी की होगी जो इन बंटे हुए समुदायों को विकास और भरोसे के नाम पर एक मंच पर ला पाएगा। 4 मई को नेमम के नतीजों पर पूरे केरलम की नजर रहेगी।