दिल्ली प्रोटेस्ट: परमहंस आचार्य ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र, प्रदर्शन के लिए अनुमति और सख्त कार्रवाई की मांग
Delhi Political Protest: जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर हिंसक प्रदर्शनों पर सख्त कार्रवाई, प्रदर्शन के लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य करने और शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की मांग की है।
- Written By: करुणा नंद शाहवाल
जगद्गुरु परमहंस आचार्य ,( सोर्स-आईएएनस)
Paramhans Acharya Droupadi Murmu Letter Delhi Protest: दिल्ली में जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखकर कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। उन्होंने आग्रह किया है कि देश में किसी भी प्रकार के अनशन, धरना, भूख हड़ताल, पदयात्रा या मार्च के आयोजन से पहले प्रशासनिक अनुमति लेना अनिवार्य किया जाए। उनका कहना है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार सभी नागरिकों को है, लेकिन यदि कोई प्रदर्शन हिंसक रूप लेता है, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है या कानून-व्यवस्था को चुनौती देता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
परमहंस आचार्य ने आरोप लगाया कि दिल्ली में चल रहा प्रदर्शन अब अपने मूल उद्देश्य से भटक चुका है और इसमें राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों के साथ कथित मारपीट, तोड़फोड़ और प्रशासन के साथ टकराव जैसी घटनाएं चिंता का विषय हैं। इसके अलावा उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की भी मांग की और कहा कि स्कूली पाठ्यक्रम में गीता, रामायण तथा देशभक्त महापुरुषों से जुड़े विषयों को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि राष्ट्रपति इस विषय पर उचित कदम उठाएंगी।
राष्ट्रपति को लिखा पत्र
परमहंस आचार्य ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति को भेजे गए पत्र में आग्रह किया है कि बिना अनुमति किए जाने वाले प्रदर्शन, यदि हिंसक या अराजक हो जाते हैं, तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
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लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन यह सब संविधान और कानून के दायरे में होना चाहिए। दिल्ली में चल रहे विरोध-प्रदर्शन को विपक्षी दलों से जुड़ा बताते हुए आरोप लगाया कि यह आंदोलन अपने मूल उद्देश्य से भटक गया है।
हिंसक प्रदर्शनकारियों पर सख्त कार्रवाई की अपील
परमहंस आचार्य ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय ध्वज हाथ में होने के बावजूद यदि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाता है या कानून-व्यवस्था भंग होती है, तो ऐसी गतिविधियों को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
आंदोलन के दौरान हिंसक घटनाएं हुई हैं और पुलिसकर्मियों को भी चोटें आई हैं। यदि कोई व्यक्ति कानून अपने हाथ में लेता है और संवैधानिक संस्थाओं का घेराव करता है, तो प्रशासन को कानून के अनुसार कार्रवाई करने का अधिकार होना चाहिए।
राजनीतिक हस्तक्षेप का लगाया आरोप
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली का मौजूदा प्रदर्शन अब छात्रों का आंदोलन नहीं रह गया है, इसमें राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी दिखाई दे रही है। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता अपने-अपने एजेंडे के साथ इस आंदोलन में शामिल हो रहे हैं, जिससे इसका स्वरूप बदल गया है।
शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की मांग
आचार्य ने अपने पत्र में शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी मांग उठाई। उन्होंने कहा कि देश के स्कूली पाठ्यक्रम में बदलाव किया जाए। मुगल और आक्रांताओं से जुड़े अध्यायों के स्थान पर गीता, रामायण और देशभक्त महापुरुषों से संबंधित विषयों को अधिक महत्व दिया जाए, ताकि छात्रों में राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित हो सके।
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प्रदर्शन के लिए अनुमति अनिवार्य करने की मांग
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना सभी का अधिकार है, लेकिन यदि कोई आंदोलन हिंसक रूप लेता है, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है या कानून-व्यवस्था को चुनौती देता है, तो उसे केवल आंदोलन नहीं बल्कि कानून-व्यवस्था का गंभीर मामला मानते हुए प्रशासन को संवैधानिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई करनी चाहिए।
परमहंस आचार्य ने विश्वास जताया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु उनके पत्र पर विचार करेंगी और भविष्य में ऐसे नियम बनाए जाएंगे, जिनसे बिना अनुमति होने वाले हिंसक प्रदर्शन रोके जा सकें तथा राष्ट्रीय संपत्ति और सार्वजनिक व्यवस्था की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।
