इंदौर त्रासदी की पूरी टाइमलाइन (डिजाइन फोटो )
Indore Water Contamination Full Timeline: मध्य प्रदेश का इंदौर शहर एक गंभीर त्रासदी से गुजर रहा है, जिसमें एक दर्जन से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से एक नवजात शिशु समेत कई लोगों की मौत हो गई है। लगातार कई वर्षों से देश का सबसे स्वच्छ शहर कहलाने वाला इंदौर अब गंदे पानी और उससे हुई मौतों के कारण सुर्खियों में है। इस घटना की जांच से शहर में फैले दस्त के प्रकोप की वजह सामने आई है, जिसके चलते बड़े पैमाने पर लोग बीमार पड़े और कई को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि इस त्रासदी के पीछे गंभीर लापरवाही और प्रशासनिक चूक है, जिसे समय रहते टाला जा सकता था।
मध्य प्रदेश के इंदौर में नगर निगम द्वारा सप्लाई किए गए दूषित पानी को पीने से कम से कम 15 लोगों की मौत होने की बात सामने आई है। मृतकों में एक नवजात शिशु और कम से कम छह महिलाएं शामिल हैं। बीते सप्ताह भागीरथपुरा इलाके में करीब 2,800 लोग बीमार पड़ गए, जबकि उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद 100 से ज्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती किया गया।
सरकार ने मृतकों की संख्या 9 से 10 बताई है, जबकि स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार दूषित पानी से 15 लोगों की जान जा चुकी है। पिछले आठ दिनों से इलाज करा रहीं गीता बाई का कल रात निधन हो गया, जिससे वह इस हादसे की एक और शिकार बन गईं। जिन परिवारों ने अपने परिजनों को खोया है, उनका कहना है कि दूषित पानी ही उनकी मौत का कारण बना। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बुनियादी ढांचे की खामियों के कारण पीने के पानी में सीवेज यानी नाले का गंदा पानी मिल गया, जिससे यह बीमारी फैली।
पीने के पानी में सीवेज का पानी मिला (Image- Social Media)
इंदौर जल त्रासदी (Image- Socil Media)
सुनील साहू, जिन्होंने अपने छह महीने के बेटे को खो दिया, उन्होंने एक न्यूज चैनल को बताया कि उन्होंने पैकेटबंद दूध में थोड़ा सा नल का पानी मिलाकर बच्चे को पिलाया था। इसके बाद बच्चे में बुखार और दस्त के लक्षण दिखने लगे। इलाज के बावजूद हालत बिगड़ती चली गई और अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई। सुनील ने कहा कि 10 साल की प्रार्थनाओं के बाद उन्हें यह बच्चा हुआ था। उन्होंने बताया, “हमें अंदाजा नहीं था कि नल का पानी इतना दूषित होगा। शायद उसी पानी की वजह से यह सब हुआ।” एक अन्य पीड़ित के परिजन ने बताया कि उनके पिता और चाची की हालत गंभीर है और दोनों अस्पताल में भर्ती हैं।
पीड़ित परिवार (Image- Social Media)
रिपोर्टों के मुताबिक, बीते एक साल में नगर निगम को पानी की गुणवत्ता को लेकर 266 शिकायतें मिली थीं। भागीरथपुरा इलाके से ही 23 औपचारिक शिकायतें दर्ज कराई गई थीं, लेकिन समय रहते कार्रवाई नहीं हुई। एनडीटीवी और अन्य रिपोर्टों के अनुसार, अगस्त 2025 में पाइपलाइन बदलने के लिए 2.4 करोड़ रुपये का टेंडर पास हुआ था, लेकिन काम शुरू नहीं हुआ। पाइपलाइन की मरम्मत तब शुरू की गई, जब मौतें होने लगीं।
लैब रिपोर्ट में पानी के 70 सैंपल में से 26 में खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए। जांच में यह भी सामने आया कि एक पब्लिक टॉयलेट पीने के पानी की मुख्य पाइपलाइन के ऊपर बना था, जिससे गंदगी सीधे पानी में मिल गई। राज्य सरकार ने घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है। अब तक 272 मरीजों को अस्पताल में भर्ती किया गया, जिनमें से कई ठीक होकर घर लौट चुके हैं। तीन अधिकारियों को निलंबित किया गया है और प्रभावित इलाकों में टैंकरों से पानी की आपूर्ति की जा रही है।
पब्लिक टॉयलेट पीने के पानी की मुख्य पाइपलाइन के ऊपर था (सांकेतिक तस्वीर)
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दूषित पानी से हैजा, टाइफाइड और पेचिश जैसी गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं। इंदौर की यह घटना दिखाती है कि साफ-सफाई के लिए मशहूर शहर भी पानी की गुणवत्ता में लापरवाही के कारण गंभीर संकट का सामना कर सकता है। सुरक्षित पानी, समय पर जांच और त्वरित इलाज ही ऐसी घटनाओं से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
Ans: नगर निगम की पाइपलाइन में सीवेज मिल जाने से दूषित पानी की सप्लाई हुई, जिससे दस्त का प्रकोप फैला।
Ans: स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार दूषित पानी से कम से कम 15 लोगों की मौत हुई है, जबकि सरकार ने कम संख्या बताई है।
Ans: दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई, प्रभावित पाइपलाइन की मरम्मत, टैंकरों से पानी सप्लाई और मरीजों का इलाज शुरू किया गया है।