सीमा विवाद पर भारत की दो टूक, लिपुलेख को लेकर नेपाल का दावा निराधार
India completely rejected Nepal's claim of its right over Lipulekh pass: भारत ने नेपाल के लिपुलेख दावों को खारिज कर दिया है। देश के अनुसार ये दावे ऐतिहासिक तथ्यों और साक्ष्य से परे हैं।
- Written By: गीतांजली शर्मा
भारत ने नेपाल के लिपुलेख दावों को सिरे से किया खारिज (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
India’s Clear Stand On Border Dispute: हालिया नेपाल के लिपुलेख दावों को देश ने सिरे से खारिज कर दिया है। भारत का कहना है कि, नेपाल के ये दावे न तो ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित हैं और न ही इनके कोई साक्ष्य के पहले से रिकार्ड हैं। लिपुलेख दर्रे के माध्यम से भारत-चीन व्यापार साल 1954 से चल रहा है। दोनों देशों के बीच का यह व्यापार कोविड के बाद से फिर से शुरू हो चुका है।
भारत पड़ोसी देश नेपाल के साथ कूटनीति और उचित संवाद के माध्यम से हर समस्या का हल निकालने के लिए तैयार है। पिछले दिनों नेपाल ने यह दावा किया था कि लिपुलेख दर्रा, जो भारत और चीन के बीच सीमा व्यापार के लिए फिर से खोला गया है, वह उसके क्षेत्र में आता है। नेपाल ने इस पूरे मसले पर नाराजगी जताई थी। साथ ही यह दावा किया था कि लिपुलेख दर्रे का यह क्षेत्र ऐतिहासिक और क्षेत्रीय दृष्टि से नेपाल का है।
भारत- चीन व्यापार पर नेपाल ने जताई आपत्ति
लिपुलेख दर्रे के माध्यम से भारत और चीन के बीच व्यापार दोबारा शुरू की जा रही है। दोनों देशों के इस शुरुआती व्यापार पर पड़ोसी देश नेपाल ने नाराजगी जताई है। इस पूरे मसले पर, प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा कि नेपाल के दावे न तो ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित हैं और न ही इनके समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य मौजूद है।
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इसलिए भारत, नेपाल की इस बेबुनियादी मांग को सिरे से खारिज करता है। जायसवाल के अनुसार किसी भी एकतरफा और जबरदस्ती के क्षेत्रीय दावों का विस्तार किसी भी तरह स्वीकार नहीं किया जाएगा।
यह है लिपुलेख व्यापार का इतिहास
साल 1954 से लिपुलेख दर्रा भारत और चीन के बीच एक पारंपरिक व्यापार मार्ग रहा है, जिसका उपयोग लगातार जारी है। यह रास्ता दोनों देशों के बीच आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की एक बहुत बड़ी कड़ी है। हालांकि, कोविड-19 महामारी के कारण यह व्यापार भी कई मुख्य कारणों की वजह से बाधित रहा।
अब, दोनों देशों के बीच व्यापार को लेकर फिर से सहमति हो चुकी है। जिसके बाद इस मार्ग को फिर से संचालित करने का साझेदारी भरा निर्णय लिया गया है। यह निर्णय बिना किसी संदेह के क्षेत्रीय सहयोग और आर्थिक प्रगति की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
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भारत -नेपाल के बीच के संबंध चुनौतिपूर्ण
भारत और नेपाल के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों के बीच लिपुलेख मुद्दा एक नई चुनौती के रूप में उभर कर सामने आ रहा है। देश ने इस पूरे मामले में कूटनीतिक नीति करने पर जोर दिया है। देश के प्रवक्ता ने कहा कि, भारत नेपाल के साथ संयमित बातचीत के लिए पूरी तरह तैयार है।
साथ ही सीमा मुद्दों को शांतिपूर्ण ढंग से हल करने के लिए कूटनीति के रास्ते अपनाने की मंशा रखता है । भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति के अनुरूप, यह नजरिया शांति और आस-पास की स्थिरता को वरीयता देता है।
