क्या है Indian Nino? जिससे आग का गोला बनता जा रहा है भारत, रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासाक्या है Indian N
What is Indian Nino: एक नई रिपोर्ट के अनुसार, 2023-24 की रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के लिए अल नीनो नहीं बल्कि 'इंडियन नीनो' (IOD) जिम्मेदार है, जिसने वैश्विक तापमान में अप्रत्याशित वृद्धि की।
- Written By: अक्षय साहू
इंडियन नीनो की वजह से हर साल बढ़ा भारत का तापमान (सोर्स- सोशल मीडिया)
Indian Nino Responsible For Increasing Heat in India: दुनियाभर के वैज्ञानिक लंबे समय से असामान्य गर्मी के पीछे के कारणों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी बीच एक नई रिपोर्ट सामने आई है। जिसमें कहा गया है कि साल 2023 और 2024 में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के लिए इंडियन ओशन डिपोल (IOD) जिम्मेदार रहा। जिसे इंडियन नीनो भी कहा जाता है। मैरीलैंड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने क्लाइमेट मॉडल के जरिये अध्ययन के बाद ये दावा किया है।
वैज्ञानिक अभी तक गर्मी के लिए अल नीनो को ही प्रमुख कारण मान रहे थे। लेकिन यह पहली बार है जब IOD को इन दो सालों की अत्यधिक गर्मी से सीधे तौर पर जिम्मेदार बताया गया है।
क्या कहती है नई रिपोर्ट
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि, 2023 और 2024 में पृथ्वी की सतह का औसत तापमान जलवायु परिवर्तन के सामान्य अनुमानों से लगभग 0.3 डिग्री अधिक रहा। 2023-24 को अब तक के सबसे गर्म साल के तौर पर दर्ज किया गया। इस दौरान विनाशकारी जंगलों की आग, भीषण लू और रिकॉर्ड स्तर की जलवायु संबंधी त्रासदी देखनें को मिली थी।
सम्बंधित ख़बरें
Weather Forecast: 12 राज्यों में तूफानी बारिश का अलर्ट जारी, जानें आपके शहर में कैसा रहने वाला है मौसम
ठाणे के मौसम का अचानक बदला मिजाज, आंधी-तूफान और बारिश से कई इलाकों में अफरा-तफरी
Unseasonal Rain: यवतमाल में बेमौसम बारिश और आंधी का तांडव; आर्णी में उड़ी घरों की छतें, फसलें बर्बाद
महाराष्ट्र में 14 से 20 मई के बीच भारी बारिश का अलर्ट, कई जिलों में ओलावृष्टि और तेज हवाओं की चेतावनी
भारत में इंडियन नीनो प्रभाव (AI जनरेटेड फोटो)
रिपोर्ट में बताया गया कि, अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने एक क्लाइमेट मॉडल तैयार किया जो प्राकृतिक और इंसानों द्वारा निर्मित कारकों के आधार पर वैश्विक तापमान का पूर्वानुमान लगाता है। इसमें यह पाया गया कि मॉडल 2023 और 2024 की तापमान स्थिति के 93 प्रतिशत और 92 फीसदी हिस्से की सटीक व्याख्या करने में सफल रहा। इसके अलावा जब मॉडल से से आईओडी को हटाया गया, तब तो 2023 में सिर्फ 69 प्रतिशत जबकि 2024 में 77 प्रतिशथ ही जानकारी दे सका। इसी के आधार पर दावा किया गया कि इन दो सालों में Indian Nino गर्मी का महत्वपूर्ण कारक रहा।
नीनो के अलावा अन्य कारक भी जिम्मेदार
रिपोर्ट में दावा किया गया कि इन दो सालों में प्राकृतिक कारकों के साथ-साथ मानवीय गतिविधियां भी गर्मी के लिए जिम्मेदार रही। इंसानी गतिविधियों के कारण तापमान में हर साल 0.022 डिग्री की बढ़ोतरी हो रही है।
सूरज की किरणें अंतरिक्ष में वापस भेजने की क्षमता घटी
सूरज की किरणें अंतरिक्ष में वापस भेजने की क्षमता घटी (AI जनरेटेड फोटो)
इसके अलावा धरती से सूरज की किरणों को अन्तरिक्ष में भेजने की क्षमता में भी गिरावट आई है। 2020 में समुद्री जहाजों के ईंधन में सल्फर की मात्रा सीमित करने को लेकर नए नियम लागू किए गए थे। सल्फर प्रदूषण कम होने से हवा की शुद्धता में तो बढ़ोतरी हुई। लेकिन सल्फर के कण सूरज की किरणों को वापस अंतरिक्ष में भेजने का काम करते थे। वे कम हो गए। इससे सूरज की किरणें और अधिक पृथ्वी तक पहुंचने लगीं। जिसने गर्मी बढ़ाने में 25 से 30 प्रतिशत का योगदान दिया।
यह भी पढ़ें- तमिलनाडु में महा-संग्राम! विजय के समर्थन में सड़कों पर उतरी जनता, भूख हड़ताल पर बैठे TVK समर्थक, देखें VIDEO
क्या है इंडियन नीनो?
प्रशांत महासागर में जिस तरह से अलनीनो का हिस्सा होता है, ठीक वैसे ही हिंद महासागर में IOD को रखा गया है, जिसे इंडियन नीनो कहा गया है। ये हिंद महासागर के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के बीच समुद्री सतह के तापमान का अंतर है। यह भारत में बारिश के पैटर्न से लेकर ऑस्ट्रेलिया में जंगलों की आग तक को प्रभावित करता है।
